गले मिले तो पुरानी यादें हो गईं ताजा
- जीआईसी में पुरातन छात्र सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कई साल तक एक जगह पढ़े, खूब मस्ती की। एक समय ऐसा आया कि जिम्मेदारियों को निभाते- निभाते दूरियां हो गईं। लेकिन, इस दूरी को जीआईसी के पुरातन छात्र संगठन ने दूर किया। पुराने साथी मिले तो मालूम हुआ कि कोई साथी अधिकारी है, कोई डॉक्टर है तो कोई बिजनेसमैन। गले मिलते ही सभी की पुरानी यादें ताजा हो गईं।
राजकीय इंटर कॉलेज प्राक्तन छात्र संगठन द्वारा आयोजित 17 वें वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत रहे। उन्होंने पुरातन छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत अर्से बाद विद्यालय आकर मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। पुराने छात्रों का मिलन और नए छात्रों से परिचय पाकर हर्ष का अनुभव हुआ है। विद्यालय हित में प्राक्तन छात्र संगठन का प्रयास सराहनीय रहा है। भविष्य में आशा करता हूं कि 2021 में विद्यालय का शताब्दी वर्ष समारोह गौरव एवं गरिमामयी ऊंचाइयों को छुएगा।
विशिष्ट अतिथि राजा बाबू सिंह ने कहा कि विद्यालय हित के लिए जो भी संभव कार्य हम से बन सकेंगे, उसको करने के लिए हम कटिबद्ध हैं। सीए जयंत मणि जैन ने छात्रवृत्ति परियोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम लोग अपने संसाधनों से विद्यालयों के छात्रों के हित में यदि कुछ अंश भी दान देते हैं तो संभवत: विद्यालय के विद्यार्थी अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सकते हैं। विवेक अग्रवाल की ओर से छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आयोजित कराया गया। इस मौके पर वेदप्रकाश अग्रवाल, प्रदीप श्रीवास्तव, जेपी अग्रवाल, नवीन यादव, राकेश पाठक, जीपी निगम, आईपी भल्ला, सीएम जितेंद्र गुप्ता सहित अन्य मौजूद रहे।
एक-दूसरे को सुनाए किस्से
एक- दूसरे को देखते ही बैचमेट्स के चेहरे खिल उठे और उनके साथ सेल्फी लेने के साथ- साथ अपनी पुरानी यादों को ताजा करने लगे। मुख्य चुनाव आयुक्त के बैच के साथियों ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया और पुराने दिनों के कुछ किस्सों को याद कर उन पर मुस्कुराते नजर आए।
परीक्षा की रात देखी फिल्म
हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। अगली सुबह अंग्रेजी की परीक्षा थी। रात को परीक्षा की पढ़ाई छोड़ कर हॉस्टल से वार्डन को बगैर बताए फिल्म देखने पहुंचा था। सुबह पलंग खाली मिलने पर कड़ी फटकार लगी थी।
- डॉ. बीके उक्सा, 1956 बैच
खूब खेला गिल्ली-डंडा
जीआईसी में पिता पढ़े और उसके बाद मैंने प्रवेश लिया। अपने समय में साथियों के साथ मिलकर पढ़ाई की और जमकर मस्ती भी की। स्कूल के मैदान पर सभी एकत्र होकर गिल्ली- डंडा और टीपू खेला करते थे।
- प्रमोद मल्होत्रा, 1959 बैच
आज भी याद है प्रिंसिपल का डंडा
अनुशासन क्या होता था? यह जीआईसी में आकर जाना था। उस समय जो प्रिंसिपल थे, वह हाथ में डंडा लेकर चलते थे। उनका छात्रों के भीतर इतना खौफ था कि उनके भ्रमण पर गैलरियां खाली हो जाया करतीं थीं।
- वीरेश्वर शुक्ला, 1958 बैच
बीआईसी में पढ़ने की थी इच्छा
उस समय प्रवेश लेने के लिए लिखित टेस्ट और इंटरव्यू हुआ करता था। मेरे चाचा ने प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कराई और चुन लिया गया, पर बिपिन विहारी कॉलेज में भाई पढ़ता था। चाचा से मैंने बीआईसी में पढ़ने की जिद की, लेकिन उन्होंने हौसला बढ़ाया।
- प्रदीप अरोरा, 1965 बैच