झांसी। घरों के बाहर बिजली के मीटर लगवाना बिजली विभाग के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है। एक तरफ तो बिजली चोरी पर अंकुश लगा है तो दूसरी तरफ राजस्व भी बढ़ा है। जांच की तो12 हजार मीटरों में गड़बड़ी मिली। संबंधित उपभोक्ताओं पर जुर्माना ठोंका गया। इससे 23 करोड़ से अधिक का राजस्व मिला।
महानगर में करीब 95 हजार विद्युत उपभोक्ता हैं। इसमे सात हजार ऐसे कनेक्शन हैं, जिनका स्थायी कनेक्शन काटे होने के बाद भी वे विभाग के रिकार्ड में चल रहे हैं। पिछले तीन साल से चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान 99 फीसदी मैनुअल मीटरों बदलकर एलएंडटी और लैंडीस कंपनी के डिजीटल मीटर घर के बाहर लगाए जा चुके हैं। इससे फायदा यह हुआ कि बिजली चोरी करना मुश्किल हो गया। पहले 100 में लगभग 50 मीटर गड़बड़ मिलते थे, लेकिन अब बमुश्किल चार-छह मामले ही सामने आ रहे हैं। नए डिजीटल मीटरों में इलेक्ट्रानिक कंपोनेंट लगे हैं, जो गड़बड़ी करने पर रीडिंग में बाधा (मीटर का स्लो चलना) उत्पन्न कर देते हैं। जांच में 12 हजार मीटरों में कारस्तानी पकड़ी जा चुकी हैं। जांच के समय विद्युत मीटर परीक्षणशाला में उपभोक्ताओं को नोटिस भेजकर या मीटर बदलते समय दी जाने वाली सीलिंग सर्टिफिकेट में तिथि लिखकर बुलाया जा रहा है। इसके बाद उपभोक्ता के सामने ही मीटर खोल कर देखा जाता है और उसकी वीडियोग्राफी कराई जाती है। विभाग को गड़बड़ी वाले मीटरों से अभी तक 23 करोड़ से अधिक राजस्व प्राप्त हो चुका है।
इनका कहना है
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कम हुई विद्युत चोरी
‘जिन क्षेत्रों में मीटर बदले जा चुके हैं, वहां चोरी थमने के साथ ही राजस्व भी अधिक मिलने लगा है। जो मीटर बदलने को रह गए हैं, उनको भी शीघ्र घर के बाहर लगवा दिया जाएगा।’
राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता (नगर)।
इस तरह वसूल रहे शमन शुल्क
विद्युत मीटर में चोरी मिलने पर घरेलू में प्रति किलोवाट चार हजार रुपये और कामर्शियल कनेक्शन में प्रति किलोवाट दस हजार रुपये शमन शुल्क जमा करना पड़ता है। बिजली उपभोग की स्थिति देखकर एक साल का कर निर्धारण होता है।