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बुंदेलखंड में 12 फीसदी कैंसर मरीज पित्त की थैली के

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झांसी। बुंदेलखंड में पित्त की थैली के मरीजों का आंकड़ा देश के तुलना में दो गुना है। चूंकि, बुंदेलखंड में स्टोन के भी खूब मरीज मिलते हैं, ऐसे में यहां 12 फीसदी मरीज पित्त की थैली में कैंसर से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों से ये बात सामने आई है।
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पित्त की थैली में लंबे समय तक पथरी रहने से ये कैंसर का कारक बन सकती है। इस बीमारी के शुरूआती लक्षण बेहद सामान्य व अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, इसमें पहले पथरी जैसी गांठ नजर आती है। बाद में दूरबीन से ऑपरेशन करवाने पर पता चलता है कि ये पथरी नहीं कुछ और है। ऐसे में कई बार दूसरा ऑपरेशन करना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पथरी का ऑपरेशन कराने से पहले सोनोग्राफी, एमआरआई करवाकर स्पष्ट कर लेना चाहिए कि पथरी ही है या कुछ और। कई बार लोग छोटी जगहों और कम जानकार व्यक्ति से अल्ट्रासाउंड करा लेते हैं। चूंकि, झांसी समेत बुंदेलखंड में पथरी के मरीज भी खूब मिलते हैं। ऐसे में पित्त की थैली में कैंसर के मरीजों की संख्या 12 फीसदी है। इसमें अधिकांश 35 से 45 साल के हैं। जबकि, देश में पित्त की थैली में कैंसर का आंकड़ा पांच से छह प्रतिशत है।
ये हैं मामले
केस-1
तीन साल तक जानकारी ही नहीं हो पाई
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में आए एक मरीज ने बताया कि उसे तीन साल से पित्त की थैली में कैंसर की समस्या है मगर इसका पता नहीं चल पाया। अल्ट्रासाउंड कराया तो बताया कि पथरी है। इसको टालता रहा। बाद में दिक्कत बढ़ी तो दोबारा जांच हुई। तब कैंसर की पुष्टि हुई।
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केस-2
पथरी के ऑपरेशन के बाद चला पता
कैंसर रोग विभाग में पंजीकृत एक रोगी ने बताया कि उसको पित्त की थैली में पथरी बताकर ऑपरेशन कर दिया गया था। मगर बाद में भी समस्या दूर नहीं हुई। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने जांच कराई। तब पित्त की थैली में कैंसर की पुष्टि हुई। अब यहां इलाज चल रहा है।
ये है कैंसर रोगियों का आंकड़ा
वर्ष रोगी
2017 467
2018 821
2019 653
2020 389
2021 346
ये होता है कारण
- मोटापा
- 40 से अधिक उम्र
- पित्त की पथरी
लक्षण
- पेट में गैस बनना
- चिकनी चीजें खाने से पेट फूलना
ऐसे पथरी से बच सकते
- खाना समय पर खाएं
- तला-भुना भोजन कम करें
- रोज व्यायाम करें
- वजन नियंत्रित रखें
- भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
- प्रोटीन से भरपूर चीजें खाएं
फोटो..
देश में पित्त की थैली के कैंसर रोगी पांच से छह फीसदी हैं। जबकि, झांसी समेत बुंदेलखंड में 12 फीसदी। अनिभिज्ञता और लापरवाही इसका कारण है। 99 फीसदी पथरी की वजह से ये कैंसर होता है। ऐसे में पथरी को नजर अंदाज न करें। सही जगह पर जांच कराएं। समय पर पता चलने जाने पर इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है। - डॉ. सचिन माहुर, विभागाध्यक्ष, कैंसर रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज।
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