फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झांसी मेडिकल कॉलेज में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब, नि:शुल्क जांच के खर्च करने पड़ रहे डेढ़ हजार

Tue, 19 Feb 2019 02:18 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
विज्ञापन
झांसी मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीजों को अल्ट्रासाउंड मशीन से होनी वाली कलर डॉप्लर और हाई रेजोलूशन (उच्च संकल्प) की जांचों की सुविधा मिलनी बंद हो गई हैं। कारण, दो अल्ट्रासाउंड मशीनों का खराब पड़ा होना और एक मशीन से सिर्फ सामान्य जांचें होना है। हाल ये है कि मेडिकल कॉलेज में जो जांचें नि:शुल्क हो जाती थीं, उनके लिए अब मरीजों को डेढ़ हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए तो ये जांचें कराना बहुत मुश्किल होता है।
विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में रखी अल्ट्रासाउंड की एक मशीन पूरी तरह कंडम हो चुकी है। जबकि, ओपीडी बिल्डिंग में रखी एक मशीन दो-ढाई महीने से खराब चल रही है। हाल ही में एक अन्य मशीन का भी प्रोप खराब हो गया है। ऐसे में इस मशीन से सिर्फ सामान्य जांचें ही हो रही हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी जांच ऑब्स कलर डॉप्लर नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में ये जांच नि:शुल्क होती है, जबकि प्राइवेट पैथालॉजी सेंटर में इस जांच के 1300-1600 रुपये वसूले जाते हैं। वहीं, अल्ट्रासाउंड मशीन से होने वाली हाई रेजोलूशन (उच्च संकल्प) जांचों की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। हाई रेजोलूशन के अंतर्गत हाथ, पैर, गर्दन, छाती, एपेंडिक्स आदि की जांचें आती हैं। ये जांचें मेडिकल कॉलेज में 200 रुपये में होती हैं, जबकि निजी केंद्रों पर 500 रुपये से शुरू होती हैं। मशीनें खराब होने से एक तरफ जहां मरीजों को पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, दूसरी तरफ बेवजह की भागदौड़ से तकलीफ उठानी पड़ रही है।

रेडियोलॉजी विभाग में एक भी मशीन नहीं
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड की एक भी मशीन नहीं है। ये बेहद गंभीर बात है। नियमानुसार रेडियोलॉजी विभाग में कम से कम अल्ट्रासाउंड की दो मशीनें होना जरूरी है। इसके लिए कॉलेज प्रशासन की तरफ से कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन


रोजाना औसतन 50 अल्ट्रासाउंड
मेडिकल कॉलेज में झांसी ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड से मरीज आते हैं। ऐसे में कॉलेज पर मरीजों का काफी लोड रहता है। कॉलेज रोजाना औसतन 50 अल्ट्रासाउंड होते रहे हैं। मौजूदा समय में मशीन खराब होने की वजह से यह ग्राफ काफी गिर गया है। निजी पैथालॉजी केंद्रों की जमकर चांदी हो रही है।

मेडिकल कॉलेज में खराब पड़ी अल्ट्रासाउंड मशीन को जल्द सुधरवाया जाएगा। दो नए प्रोप की खरीद के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा। इसके अलावा दो नई अल्ट्रासाउंड मशीनों की भी मांग की जाएगी।
विज्ञापन

- डॉ. एनएस सेंगर, रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें