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नगर निगम ने कब्जामुक्त कराई जमीन-City

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श्रेणी - सिविकएमीनिटीज
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फोटो
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बसपा नेता से कब्जामुक्त कराई 20 करोड़ की जमीन
सब हेड -- 43 साल से था कब्जा, 1995 में समाप्त हो गई थी किराए की अवधि

- डड़ियापुरा में 4.70 एकड़ जमीन पर हो रही थी फूलों की खेती
- द्वेषभावना से बिना सूचना दिए की कार्रवाई : सीताराम कुशवाहा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
नगर निगम ने मोहल्ला डड़ियापुरा में बहुजन समाज पार्टी के नेता सीताराम कुशवाहा से 4.70 एकड़ जमीन को कब्जामुक्त करा लिया है। किराए पर चल रही इस जमीन के किराए की अवधि 19 जनवरी 1995 को समाप्त हो गई थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया था। जमीन की कीमत 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। बसपा नेता सीताराम कुशवाहा ने द्वेषभावना से सूचना या नोटिस दिए बिना ही कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
मोहल्ला डड़ियापुरा में सदाशिवराव का बगीचा में नजूल की 4.70 एकड़ जमीन है। मोहल्ला बाहर ओरछा गेट निवासी सीताराम कुशवाहा को जमीन किराये पर दी गई व इसकी अवधि 19 जनवरी 1995 को समाप्त हो गई थी। जमीन फ्री होल्ड कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जिसमें न्यायालय ने 06 नवंबर 2009 को आदेश दिया कि जिलाधिकारी इस पर फैसला करें।
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17 मार्च 2018 को जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने आदेश दिया कि नजूल नीति के अंतर्गत 15 जनवरी 2015 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार नजूल भूमि केवल पट्टाधारक, पट्टाधारक के उत्तराधिकारी या विधिक खरीदार के पक्ष में ही फ्री होल्ड की जा सकती है। याचिका कर्ता अवैध कब्जेदार हैं। चूंकि याची नजूल भूमि के पट्टेधारक की श्रेणी में नहीं आते हैं और आवेदक का फ्री होल्ड संबंधी आवेदन 31 दिसंबर 99 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया था। ऐसी स्थिति में आवेदक का प्रत्यावेदन नजूल नीति के अंतर्गत नहीं आने के कारण खारिज कर दिया है।
आदेश के क्रम में संयुक्त नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह, अतिक्रमण हटाओ प्रभारी डा. पुष्पराज गौतम, संपत्ति अधिकारी चंद्रिका प्रसाद, लेखपाल, कानूनगो समेत पूरी टीम मौके पर पहुंची और मशीन चलाकर फूलों की खेती मटियामेट कर दी। जानवरों के पानी पाने के लिए बनी चरही तोड़ दी और ताला लगाकर कब्जा ले लिया।
उधर, बसपा नेता सीताराम कुशवाहा ने नगर निगम पर द्वेषभावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें कोई नोटिस दिया और न ही कोई पूर्व सूचना दी। वह 43 साल से जमीन की देखरेख कर रहे थे, उन्होंने एक इंच का भी अवैध निर्माण नहीं किया है। उन्होंने जमीन का 25 प्रतिशत पैसा भी जमा किया था। नगर निगम पहले कहता रहा कि जमीन खेती योग्य है, फिर कहने लगा कि व्यावसायिक है। इससे विभाग की मंशा का पता चलता है।
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इनसेट
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गुलाब और गेंदा के फूल हुए नष्ट
खेत पर जेसीबी चला देने से सब्जी, गेंदा और गुलाब के फूलों की खेती नष्ट हो गई। इससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

कोट--
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किराए का आकलन किया जा रहा
कब्जामुक्त कराई गई जमीन के किराए का आकलन किया जा रहा है। 1995 से अब तक कितना किराया लिया जाना चाहिए, जल्द तय हो जाएगा। इसके बाद नोटिस जारी करेंगे और किराए की वसूली भी करेंगे।
- अरुण कुमार गुप्ता, संयुक्त नगर आयुक्त
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