‘शब्द’ को ‘सम्मान’ देने का बेहतर प्लेटफॉर्म
सब हेड: साहित्यकारों, हिंदी के जानकारों अमर उजाला को बताई राय
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
साहित्य का, साहित्य के लिए, साहित्य को समर्पित ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’ के फैसले का वरिष्ठ साहित्यकारों और हिंदी के जानकारों ने खुले दिल से स्वागत किया है। इनका मानना है कि अमर उजाला ने साहित्यकारों को एक प्लेटफॉर्म दिया है, जिसके जरिए वे पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ सकते हैं। ये फैसला सिर्फ लेखक ही नहीं बल्कि साहित्य को बढ़ावा देने में सशक्त माध्यम बनेगा।
प्रबुद्धजनों का मानना है कि संसद और विधानसभा में बैठे राजनीतिक साहित्यकारों पर हावी हो गए हैं, जो अपनी पसंद के साहित्यकारों को सम्मान दिलाते हैं। मगर अमर उजाला ने साहित्य की संवेदनशीलता को समझा। अब समाज की पीड़ा उठाने वाले साहित्यकारों को एक अवसर मिला है कि वे आगे बढे़ं और अपना हक अर्जित करें। साहित्य में रुचि वालों में चर्चा है कि इस प्रोत्साहन से युवा पीढ़ी लिखने को प्रेरित होगी। उनका किताबों के प्रति झुकाव होगा। शब्दों के इतिहास और उनके भाव को पहचानेंगे। साहित्यकार हमेशा अपनी रचना में मौलिकता देता है, जिसका सीधा प्रभाव आम नागरिक पर पड़ता है। नैतिकता और आचरण का विस्तार होता है।
अध्ययन से जुड़े प्रबुद्ध वर्ग की राय है कि ‘अमर उजाला’ ने साहित्य क्षेत्र में शब्द सम्मान देने की जो घोषणा की है, वह अत्यंत सराहनीय है। इसके अंतर्गत आकाशदीप, थाप, छाप और भाषा बंधु श्रेणियों में क्रमश: समग्र अवदान, नवोदित कलम, वरिष्ठ साहित्यकार तथा भाषाई अंतरण या भारतीय भाषाओं में अनुदित लेखन पर पुरस्कार दिए जाने हैं। सम्मान रचनाकार द्वारा रचित कृति की सफलता का प्रमाणपत्र तो है ही लेकिन इससे इतर भी उसका महत्व है। सम्मानों से साहित्यकार के भीतर भी अच्छा साहित्य रचने की जिजीविषा उत्पन्न होती है। ‘अमर उजाला’ ने जिन शब्द पुरुषों के शब्द सम्मान का फैसला लिया है, वह बहुत प्रशंसनीय एवं हिंदी साहित्य को विस्तार देने वाला है।
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साहित्य में आएगा परिवर्तन
‘अमर उजाला’ शब्द सम्मान से निश्चित ही साहित्य में परिवर्तन आएगा। चिंतन मनन का दायरा युवा साहित्यकारोें में बढे़गा। यह केवल मनोरंजन के दायरे तक में ही सीमित नहीं रह जाएगा।
- जानकी शरण वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार।
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साहित्य को मिलेगा बढ़ावा
‘अमर उजाला’ के इस सार्थक पहल से निश्चित ही साहित्य को बढ़ावा मिलेगा। आज जरूरी है कि साहित्य और साहित्यकारों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। जब नई पीढ़ी जागरूक होगी, तो निश्चित है कि लेखन भी अच्छा होगा।
- चंद्ररेखा सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार।
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जितनी प्रशंसा की जाए कम
‘अमर उजाला’ ने साहित्य को सम्मानित करने का अनूठा उपक्रम किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। ये पुरस्कार निश्चित ही हिंदी लेखन और साहित्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे।
- डॉ. पुनीत बिसारिया, एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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सामान्य पाठक साहित्य से जुड़ेंगे
वास्तव में इस प्रकार के साहित्यिक सम्मान से सामान्य पाठक में भी साहित्य से जुड़ने की ललक पैदा होगी। जो नए साहित्यकार हैं, उन्हें भी बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी।
- डॉ. विनम्रसेन सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।