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ग्रामीण क्षेत्रों में खूब ट्रांसफार्मर खराब-City

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बिजली के बावजूद अंधेरे में कई गांव
क्षमता न बढ़ने के कारण अक्सर खराब हो जाते ट्रांसफार्मर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है। इस कारण वे अक्सर ओवरलोड हो जाते हैं और फिर खराब हो जाते हैं। इस समस्या से बिजली होने के बाद भी दो- दो दिन तक गांवों में अंधेरा पसरा रहता है। जनपद के 100 ऐसे गांव हैं, जहां ओवर लोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर 15 दिन भी नहीं चल पा रहा है।
मुख्यमंत्री बुंदेलखंड के किसानों को 24 घंटे बिजली देना चाहते हैं। मगर, अभी शहरी क्षेत्रों को 24 और ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली दी जा रही है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युत ढांचा इतना अधिक कमजोर है कि गांवों के ट्रांसफार्मर ओवर लोडिंग व जर्जर तारों के कारण धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। पिछले दो दिन में ही बेहटा, खिरिया, चिरगांव, पूंछ जलापूर्ति, झबरा, पसौरा, पठाकरका, तेजपुरा, मऊरानीपुर आईटीआई कालेज, उल्दन, इस्किल, सिमरधा, बंका पहाड़ी, बंगरा हाट मैदान, गौती, गुरसराय चकौरी रोड, तेजपुरा, शेखर, बामौर, छिरौना समेत समेत 30 ग्रामीण क्षेत्रों के ट्रांसफार्मर फुुंक गए। हर महीने से तीन सौ से अधिक ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। पावर कारपोरेशन ने दो माह पहले ग्रामीण क्षेत्रों में क्षमता वृद्धि अभियान चलाया था। मगर, इसका असर झांसी जनपद में दिखाई नहीं दिया। इसका ही परिणाम है कि ट्रांसफार्मरों का फुंकना जारी हैं।
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हालांकि, शासन ने शहरी क्षेत्रों में 24 और ग्रामीण में 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के आदेश दे रखे हैं, जिसका पालन हो रहा है। लेकिन अगर, ट्रांसफार्मरों के फुंकने की यही स्थिति बनी रही तो आगे समस्या और विकराल हो जाएगी। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।

‘ जिन गांवों में ट्रांसफार्मर ज्यादा खराब हो रहे हैं, उनको चिह्नित कर लिया गया है। इन गांवों में लगे ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जा रही है। साथ ही इन गांवों में चेकिंग कर बिजली रोकने के अलावा नए कनेक्शन देने का काम होगा। नए कनेक्शन के लिए गांव में ही शिविर लगेगा।’
आरपीएस तोमर, मुख्य अभियंता विद्युत वितरण।


ये भी कारण
- 20 साल से एक क्षमता के लगे ट्रांसफार्मर
- हर गांव में तीन गुना बढ़ गए परिवार
- चोरी बढ़ी, कनेक्शन भी बढ़े
- ट्रांसफार्मरों पर नहीं लगे रहते फ्यूज
- जर्जर तारों का टूटना, कटिया


ये रहा आंकड़ा
15 अप्रैल से 17 जुलाई के बीच घुघुवा में चार, बरेठी में चार, नोटक्षीर बरुआसागर में चार, निगौना खेड़ा बरुआसागर में चार, नयाखेड़ा में तीन, जारहाकला में सात, पूंछ टाउन में तीन, खिरिया घाट में चार, दिगारा में चार, पालर गांव में पांच, करगुवा में दो, पहाड़ी चिरगांव में तीन, सुलतानपुरा में तीन, मुस्तरा में चार, बेहटा में दो, पहाड़ी चुंगी में तीन, जौहरी बुजुर्ग में तीन, जौरी बुजुर्ग में दो, छपरा गांव में छह, छिरौरा में दो, दिगारा में चार, मड़ौरा में तीन, बैदौरा में तीन, करारी में तीन, सिमरिया में तीन, पलींदा में तीन, आरी में तीन, लकारा में पांच, परवई दाता नगर में तीन, चंदवारी में पांच, सिलोरी में तीन, वमनुवा में में तीन, बेरवई में छह, घुरइया में पांच, ककवारा में चार, पचौरा में पांच, सिजारी बुजुर्ग में पांच, भकौरा में पांच, बिजौरा में चार, बसारी में चार, टहरौली थाने के पास तीन, गोराई बाजार गुरसराय में तीन, भानपुरा में चार, सकरार नैगांव रोड में तीन, इमलिया में तीन, मगरपुर में तीन, कुरैंचा में चार, सरकार में छह, सिमरधा में चार, बछेह में तीन, ढकरवारा में तीन बार ट्रांसफार्मर खराब हो चुका है।
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वर्कशाप में नहीं कमी
मुन्नालाल वर्कशाप में हर माह तीन सौ से अधिक ट्रांसफार्मर मरम्मत कर नए बनाए जाते हैं। इसके अलावा ट्रांसफार्मरों की कमी को उरई, आगरा, सिकोहाबाद, अमेठी, मेरठ, कानपुर की फर्मों से भी पूरा किया जाता है।
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