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रेलवे स्टेशन का फोटो
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टूटी रेलवे की नींद, कम होगा प्रीमियम पार्किंग का किराया
- समय में भी छूट बढ़ेगी, ट्रेन लेट होने पर मिलेगी राहत, 14 को होगा नया टेंडर
- अमर उजाला की मुहिम का हुआ असर, जनता की भी मिल रही आपत्तियां
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला की मुहिम के बाद आखिर रेलवे की नींद स्टेशन परिसर में महंगे प्रीमियम पार्किंग पर टूटी है। तय हुआ है कि नए टेंडर में पार्किंग किराया कम होगा। समय में छूट बढ़ेगी और ट्रेन लेट होने पर भी राहत दी जाएगी। 14 अगस्त को नए टेंडर के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
रेलवे स्टेशन परिसर में पर्याप्त जगह होने के बाद भी लोगों को बेहद महंगा पड़ रहा है। प्रीमियम पार्किंग के महंगे किराए से बचने के लिए अब लोग मजबूरन अपनी गाड़ियों को स्टेशन परिसर में ले जाने की जगह बाहर ही दूर तक सड़क किनारे खड़ी करके इंतजार करने लगे हैं। इस समस्या को अमर उजाला तीन अगस्त से लगातार खबरों के माध्यम से उठा रहा था। इस मुहिम का साथ देते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी रेल अफसरों को फोन और पत्र लिखना शुरू कर दिए। जनता की आपत्तियां भी रेल प्रशासन के पास पहुंच रही थीं। इस मुहिम पर रेल प्रशासन गंभीर हो गया है। प्रशासन ने किराए की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
तय हुआ है कि नए टेेंडर में प्रीमियम पार्किंग का किराया कम होगा। 20 मिनट के समय भी छूट बढ़ेगी। साथ ही ट्रेन लेट होने पर उसका कारण आने वाले यात्री के टिकट पर दर्शाने की व्यवस्था होगी, ताकि देरी होने पर वाजिब किराया लिया जा सके।
‘किराया कम करने के लिए योजना तैयार की जा रही है, जिसे स्वीकृति के लिए डीआरएम के पास भेजा जाएगा। समय में भी छूट बढ़ेगी। नए ठेके में यह रियायतें शुरू हो जाएंगी। तीन जुलाई को तीन माह के लिए ठेका दिया गया था। नए ठेके के लिए 14 अगस्त को टेंडर डलने हैं।’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
अभी ये है व्यवस्था
रेलवे परिसर में संचालित प्रीमियम पार्किंग व्यवस्था में आने वाले चार पहिया वाहनों से पहले बीस मिनट में कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। इसके बाद 21 से 30 मिनट तक 60 रुपये, 31 से 59 मिनट तक 118 रुपये, एक घंटे से दो घंटे तक 236 रुपये तथा इसके बाद 354 रुपये प्रति घंटे लिए जा रहे हैं। ठेकेदार ने एक तरफ प्रवेश व दूसरी तरफ निकास द्वार बना रखा है। प्रवेश द्वार में घुसते ही रसीद काटी जा रही है व उस पर समय डाला जा रहा है। निकास द्वार से निकलने पर ही समय के हिसाब से किराया लिया जा रहा है। अगर दिन में कोई एक से अधिक बार भी स्टेशन आता है तो उससे दोबारा किराया लिया जाता है। अगर आपने जायज कारण बताकर पैसे देने से मना या कम करने की बात की तो ठेकेदार के कर्मचारी दुर्व्यवहार पर उतर आते हैं। इससे झगड़े होते हैं।