रेलवे स्टेशन परिसर में ठहरने वाले यात्रियों को चाय और पानी तक नसीब नहीं हो पा रही है। एक किलोमीटर के दायरे में एक दुकान तक नहीं है। यात्री शेड में कैंटीन खोलने की योजना भी डेढ़ साल से ठंडे बस्ते में है। प्लेटफार्म पर जाते हैं तो कार्रवाई का डर रहता है। इससे लोग परेशान हो रहे हैं।
झांसी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन 25 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। सबसे ज्यादा महोबा, छतरपुर, मऊरानीपुर, राठ, हमीरपुर, गरौठा, मोंठ समेत अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जो दूसरे शहरों में मजदूरी करने जाते हैं। झांसी स्टेशन से ही ट्रेन में सवार होते हैं। शाम होते ही इन यात्रियों की भीड़ बढ़ना शुरू हो जाती है, जो सुबह तक बनी रहती है। चूंकि, यह यात्री जनरल टिकट पर सफर करते हैं, इस कारण ट्रेन आने के वक्त ही टिकट लेते हैं। बाकी वक्त रेलवे परिसर में बैठकर गुजारते हैं। यहां से ट्रेन बदलने वाले यात्रियों का भी यही हाल रहता है। मगर, विगत सात जुलाई 2018 को रेलवे स्टेशन परिसर में स्थापित जन आहार केंद्र के तोड़े जाने के बाद से यात्री परिसर में चाय, खाना और पानी तक को तरस रहे हैं।
दरअसल, जन आहार केंद्र पर 15 रुपये में जनता भोजन, 20 रुपये में दाल, चावल, 30 रुपये में दस पूड़ी, सब्जी, रायता, 60 रुपये में पांच रोटी, सब्जी, दाल, चावल, अचार, रायता, आठ रुपये में समोसा, 10 रुपये में कचौड़ी, पांच रुपये में चाय और सात रुपये में कॉफी उपलब्ध थी। यहां पर गरीब तपके के यात्रियों को जेब और जरूरत के हिसाब से यहां खाना उपलब्ध हो जाता था। प्लेटफार्म पर बने भोजनालय की व्यवस्थाओं को देख गरीब यात्री उनमें प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। बैठने की भी पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। इससे समस्या बढ़ गई है।
रेलवे स्टेशन पर मास्टर प्लान के तहत काम चल रहा है। यात्री रेलवे प्लेटफार्म पर उपलब्ध खानपान सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। साथ ही यात्री शेड में कैंटीन खोलने की अभी कोई योजना नहीं है। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।