‘यात्रियों के साथ शोधार्थियों को भी रिझाएं’
सब हेड: बुंदेली साहित्य और रीति रिवाजों के प्रचार से मिलेगा पर्यटन को बढ़ावा
सब हेड:
- विश्व पर्यटन दिवस पर राजकीय संग्रहालय में हुई गोष्ठी में दिए गए सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
विश्व पर्यटन दिवस पर राजकीय संग्रहालय में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बुंदेली रीति रिवाजों और साहित्य का प्रचार-प्रसार करने से यात्रियों के साथ शोधार्थियों का भी यहां आगमन होगा। इससे पर्यटन के साथ हमारी संस्कृति का भी विकास होगा। पर्यटन विभाग और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गोष्ठी में कई जानकारियां दी गईं।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने कहा कि कहीं भी प्राचीनता दिखेगी, तो उसे जानने के लिए पर्यटक स्वत: जाएंगे। जरूरत है कि ललितपुर और महोबा के प्राचीन मंदिर, स्मारकों के सही प्रचार-प्रसार की। साथ ही झांसी में पर्यटन विकास के लिए भी प्रयोग होना जरूरी है। इतिहास के जानकार मुकुंद महरोत्रा ने कहा कि बुंदेलखंड में पर्यटन विकास के लिए लगातार शोध होने चाहिए। प्राचीन पौराणिक साहित्यों में बुंदेलखंड क ी प्रकृति का वर्णन है। बीयू के प्रवक्ता डॉ. पुनीत बिसारिया ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन देशी-विदेशी पर्यटकोें का स्वागत पर्यटन विभाग बुंदेली अंदाज में कराए, इससे पर्यटक आकर्षित होंगे। बुंदेली साहित्य का प्रचार-प्रसार भी पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डॉ. कल्याण सिंह यादव ने कहा कि बुंदेलखंड में रोमांचक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कालिंजर में पैरा ग्लाइडिंग की व्यवस्था है। संगोष्ठी में राजकीय संग्रहालय निदेशक डॉ. आशा पांडेय, पंकज अभिराम पाठक, अरुण द्विवेदी, राम कुमार साहू ने भी अपने सुझाव दिए। इस अवसर पर वीरांगना होटल प्रबंधक मुकुल गुप्ता, रमेश श्रीवास, डॉ. उमा पाराशर, हेमलता, मधु आदि मौजूद रहे।