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अदर्स: रेलवे बोर्ड का आदेश पर ताक पर-City

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‘साहब’ के सेवा में समर्पित हैं ट्रैकमैन
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सब हेड: रेलमंत्री का आदेश ताक पर, दस सितंबर हटाने थे
क्रासर
झांसी रेल मंडल में एक हजार ट्रैकमैनों की चल रही कमी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
मंडल में एक हजार ट्रैकमैनों (ट्रैक मेंटेनर) की कमी होने के बाद भी उनको ऑफिस और बंगलों में काम कराने का मोह अधिकारियों का खत्म नहीं हो रहा है। जबकि लगातार हो रहे रेल हादसों से सबक लेते हुए रेल मंत्री ने बंगलों और ऑफिस पर तैनात ट्रैकमैनों को तत्काल प्रभाव से ट्रैक पर भेजने के निर्देश दिए थे। इसके लिए दस सितंबर तक का वक्त दिया गया था। लेकिन, अब भी दो सौ से अधिक ट्रैकमैन बंगलों और मंडल के अगल-अलग डिपो कार्यालयों में पर ही नजर आ रहे हैं।
रेल पटरियों (ट्रैक) के रखरखाव का काम रेल पथ निरीक्षक के नेतृत्व में होता हैं। ट्रैक पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण पीडब्लूआई के लिए रखरखाव करना मुश्किल होता जा रहा है। इसका एक कारण उनके गैंग में ट्रैकमैनों की कमी भी हैं। सिंगल ट्रैक पर एक गैंग में कम से कम 12 और डबल ट्रैक पर 24 ट्रैकमैन का होना जरूरी हैं, तभी पटरियों का रखरखाव बेहतर ढंग से किया जा सकता है। झांसी रेल मंडल में किलोमीटर के हिसाब से कम से कम पांच हजार ट्रैकमैनों की आवश्यकता हैं, जबकि 3970 ही तैनात हैं। इस संख्या में भी पांच सौ से अधिक ट्रैकमैन इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों और अन्य उच्च अधिकारियों के बंगलों और मंडल के अलग-अलग डिपो कार्यालय में काम कर रहे थे।
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पिछले दिनों लगातार बढ़ते रेल हादसों के कारण रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने दस सितंबर तक सभी ट्रैकमैनों को पटरियों के रखरखाव में लगाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इस आदेश के बाद भी अभी तक तीन सौ कर्मचारियों को ही ट्रैक पर भेजा गया है। दो सौ के करीब अभी कार्यालय और बंगलों पर लगे हैं।
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‘सभी ट्रैकमैन पटरियों पर ही काम कर रहे हैं। बंगलों और कार्यालयों में काम कराने की सूचनाएं गलत हैं।’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।

गुलामों की तरह कराया जाता है काम
ऑफिस और बंगलों पर लगे ट्रैकमैनों से गुलामों की तरह काम कराया जाता है। अभी भी दो सौ से अधिक ट्रैकमैन अलग-अलग जगह काम कर रहे हैं। गोपनीय तरीके से ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए।
विश्वनाथ सिंह यादव, सहायक सचिव, रेलवे कर्मचारी ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन।
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