झांसी। जिले में एक लाख 21 हजार परिवार ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक हालत काफी दयनीय है। मनरेगा के सघन सहभागिता नियोजन अभ्यास के तहत हुए सर्वे में यह तस्वीर सामने आई है। इन परिवारों को मनरेगा के तहत नियमित रोजगार दिलाया जाएगा।
बुंदेलखंड में रोजगार के लिए हो रहे पलायन को रोकने के लिए ग्राम्य विकास मंत्रालय ने निर्देश दिए थे कि ऐसे परिवारों का चिह्नित करें जिनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। साथ ही उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ न मिला हो।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत सघन सहभागिता नियोजन अभ्यास कार्यक्रम में गठित समूहों को ऐसे परिवारों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सोशल आडिट टीमों के सदस्यों के नेतृत्व में गठित समूहों द्वारा किए गए सर्वे में जिले के एक लाख 21 हजार परिवार अति वंचित पाए गए।
सर्वे रिपोर्ट आने के बाद इन परिवारों को रोजगार दिलाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। प्रथम चरण में इनके लिए मनरेगा के तहत तीस लाख अस्सी हजार मानव दिवस सृजित किए जाएंगे।
तय समय पर नहीं हो सकी फीडिंग
जिले में तलाशे गए 1.21 लाख परिवारों का विवरण मनरेगा की वेबसाइट पर ऑनलाइन फीड होना था। सभी के डाटा फीड करने के लिए 18 फरवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी।
लेकिन, 18 फरवरी तक लक्ष्य के सापेक्ष महज 16 हजार परिवारों का विवरण ही फीड हो सका। मनरेगा सेल के अनुसार इसकी सूचना प्रदेश मुख्यालय को भेज दी गई है। फीडिंग के लिए अभी और समय मिलेगा।
सभी अति वंचित परिवारों की फीडिंग कराई जा रही है। फीडिंग होने के बाद सरकार इसके लिए बजट बनाएगी। नये वित्तीय वर्ष में इन सभी परिवारों को रोजगार दिलाया जाएगा।
विकास मिश्रा, उपायुक्त, मनरेगा, झांसी।