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Sanjeev Jeeva: अतीक-अशरफ हत्याकांड के जैसी कहानी, फिर वारदात को रहस्यमयी क्यों बनाया? सभी सवाल अनसुलझे

Sun, 11 Jun 2023 08:46 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

गैंगस्टर संजीव जीवा हत्याकांड के चार दिन बाद भी पुलिस की नाकामी साफ दिख रही है। अभी तक न मकसद का पता न ही साजिशकर्ता का।  साजिशकर्ता कौन है? रिवॉल्वर किसने मुहैया कराई? विजय को मोहरा किसने बनाया? सब सवाल अनसुलझे हैं। सात जून को शूटर विजय यादव ने कोर्ट रूम के अंदर गैंगस्टर जीवा को गोलियों से भून दिया था।
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Sanjeev Jeeva Murder - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुख्यात गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा हत्याकांड में अब तक कमिश्नरेट पुलिस की बड़ी नाकामी रही है। वारदात को अंजाम देने वाला शूटर विजय यादव पहले ही दिन पुलिस की गिरफ्त में आ गया था। चार दिन बीत चुके हैं। अब तक पुलिस न तो वारदात को अंजाम देने की वजह पता कर सकी और न ही साजिशकर्ता को बेनकाब कर पाई। 
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अफसरों के पास सिर्फ एक जवाब है कि केस की विवेचना जारी है। हर सवाल पर वह चुप्पी साधे हुए हैं। सात जून को गैंगस्टर संजीव की पेशी थी। वह एससी-एसटी कोर्ट पहुंचा था। दोपहर करीब 3:50 बजे जब वह कोर्ट रूम के भीतर कदम रखा था तभी पीछे से उस पर गोलियां बरसा दी गई थीं। 

मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। वकीलों ने शूटर विजय यादव को दबोच लिया था। पूछताछ के बाद उसको न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वारदात को चार दिन बीत चुके हैं। लेकिन, पुलिस की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। इतनी बड़ी वारदात में पुलिस की नाकामी चरम पर है। 
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शूटर विजय यादव ने किसके इशारे पर संजीव का कत्ल किया और वजह क्या थी? रिवाॅल्वर किसने मुहैया कराई? ये तीन सवाल सबसे अहम हैं। पर, अफसर इनका जवाब अब तक नहीं पता कर सके हैं। हैरानी है कि जब हमलावर पकड़ा जा चुका है तो वारदात के खुलासे के हर पहलू रहस्यमयी क्यों है।

कुछ तो है जो छिपाया जा रहा
शूटर विजय से संबंधित जो सामान्य से सवाल हैं, पुलिस उनके भी जवाब नहीं दे रही है। जैसे कि शूटर लखनऊ में किसके संपर्क में था? उसके साथ कौन कौन लोग शामिल हैं? क्या हमले के वक्त कोर्ट में उसका कोई और साथी बैकअप के लिए मौजूद था या नहीं? वह किधर से कोर्ट रूम तक पहुंचा था? आदि सवालों पर अफसर जवाब ही नहीं दे रहे हैं। इससे आशंका बढ़ती जा रही है कि ऐसा तो नहीं कि कुछ छिपाया जा रहा है।

आखिर वारदात को रहस्यमयी क्यों बनाया
अमूमन ब्लाइंड घटना के खुलासे में वक्त लगता है। इसमें ऐसा कुछ नहीं है। क्योंकि घटना के दौरान ही शूटर पकड़ लिया गया था। ऐसे में सवाल है कि वारदात को इतना रहस्यमयी क्यों बना दिया गया। शुक्रवार को ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर ने वारदात के संबंध में एक प्रेसवार्ता भी बुलाई थी, जिसमें पुरानी चीजों को सिर्फ दोहराया गया। जो सवाल थे वो अभी भी बरकरार हैं।
 

एक जैसी कहानी, सवाल तो खड़े होंगे ही
माफिया अतीक-अशरफ हत्याकांड से मिलती जुलती ये भी घटना है। उस वारदात को जिन आरोपियों ने अंजाम दिया था वह घर से दूर रह रहे थे। विजय भी लंबे समय से बाहर था, बस एक महीने के लिए गया था। आर्थिक स्थिति भी एक जैसी है। उन आरोपियों की भी अतीक व अशरफ से कोई रंजिश नहीं थी, विजय का भी कोई कनेक्शन जीवा से नहीं रहा। वहां भी मकसद व साजिशकर्ता का खुलासा नहीं हो सका, वही पहलू यहां भी अनसुलझे हैं। दोनों हत्याकांड की एक जैसी कहानी बनती जा रही है। इसलिए सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
 

कोर्ट रूम में जीवा की हत्या
आपको बता दें कि पुलिस हिरासत में लखनऊ के एससीएसटी कोर्ट रूम में बुधवार दोपहर बाद मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा (50) की हत्या कर दी गई। वकील के लिबास में आए हमलावर ने कोर्ट रूम में ही रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ छह राउंड फायरिंग की। 

इस दौरान दो पुलिसकर्मियों, एक डेढ़ साल की बच्ची व उसकी मां को भी गोली लगी। जीवा पर हमलावर ने पीछे से फायरिंग की। वारदात के बाद वकीलों ने दौड़कर हमलावर को दबोच लिया और पीटकर पुलिस को सौंप दिया। घायलों को ट्रामा में भर्ती कराया गया है। 
 
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वारदात के बाद आक्रोशित वकीलों ने प्रदर्शन कर पथराव कर दिया। जिसमें एसीपी चौक का सिर फट गया। कई वाहन भी छतिग्रस्त हो गए। आलाधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तब हालात पर काबू पा सके।
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