24- रामपुर क्षेत्र के अमरा गांव में हत्यारोपी पकड़ने पंहुची पुलिस को ग्रमीणों न बनाया बंधक।
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बरसठी। रामपुर थाना क्षेत्र के औंरा गांव में बुधवार को दोपहर हत्याकांड के खुलासे के लिए गांव के लोगों की पिटाई से क्षुब्ध लाठी, डंडा, खुरपी और हंसिया से लैस महिलाओं ने थानाध्यक्ष को घेर लिया। चालक ने गाड़ी को आगे बढ़ाना चाहा तो नाराज महिलाओं ने चाबी निकाल ली। स्वास्थ्य का हवाला देते हुए थानाध्यक्ष ने छांव में चलने को कहा लेकिन घेरने वाली महिलाओं पर कोई असर नहीं पड़ा। महिलाएं हिरासत में लिए गए युवकों के साथ मारपीट की घटना से नाराज थीं।मौके पर पहुंचे सीओ ने एसपी से उनकी बात कराई। एसपी ने गांव में आकर समस्या सुनने का भरोसा दिया तो करीब पौने चार घंटे बाद उन्होंने थानाध्यक्ष को मुक्त किया।
औंरा गांव निवासी सुनील पटेल की 18 अगस्त को हत्या कर शव खेत में फेंक दिया गया था। इस सिलसिले में थानाध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा ने गांव से दस लोगों को हिरासत में लेकर दस दिनों तक पूछताछ की। इस दौरान उनको बुरी तरह पीटा गया। सुराग नहीं मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया। हिरासत से छूटकर घर आए अमित पटेल (19) और लल्लू यादव (25) की दशा देखकर परिजन आक्रोशित हो गए। युवकों ने थाने में मिली यातना के बारे में परिजनों से बताया। पुलिस ने मंगलवार को भी गांव में बांकेलाल पटेल की पिटाई की थी। बुधवार की दोपहर एक बजे थानाध्यक्ष जग्गू लाला के पोखरा के पर पहुंचे और राजेश पटेल को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही सैकड़ों महिलाएं लाठी, डंडा, खुरपी और हसिया लेकर पहुंच गई। महिलाओं की भीड़ और उनका गुस्सा देख थानेदार भागने लगे लेकिन महिलाओं ने जीप को घेरकर चाबी निकाल ली। उन्होंने ऐलान कर दिया कि एसपी के आने पर ही मुक्त करेंगी। थानाध्यक्ष गाड़ी छोड़कर भागना चाहे लेकन महिलाओं ने पकड़ लिया और धूप में ही खड़े रखा। थानाध्यक्ष ने सीओ अवधेश कुमार शुक्ला को सूचना दी। मौके पर पहुंचे सीओ की बात भी मानने को महिलाएं तैयार नहीं हुई। कहा कि एसपी आएंगे तभी छोड़ेंगी। सीओ ने एसपी से बात कराई और उन्होंने शाम को आठ बजे गंव में आकर उनकी बात सुनने और दोषी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। पौने चार घंटे बाद 4:45 बजे महिलाओं ने थानाध्यक्ष को मुक्त किया। मुक्त होते ही वह दौड़कर दो सौ मीटर दूर नहर के पास जाकर खड़े हुए। महिलाओं ने चबी दी तब चालक जीप लेकर गया। सीओ अवधेश कुमार शुक्ला का कहना है कि थानाध्यक्ष को महिलाओं ने गांव में रोक रखा था। समझाने बुझाने के बाद महिलाएं शांत हुई।