इसके बाद कुएं में देखा तो जुड़वां बेटों के शव पानी में उतराए थे। दोनों शव को बाहर निकाला गया। बेटी की तलाश की जा रही थी। रात 11:30 बजे पाइप कम पड़ने के कारण फायर ब्रिगेड ने रेस्क्यू को रोक दिया था। सोमवार सुबह 9 बजे से पुलिस ने फिर से रेस्क्यू शुरू कराया। साढ़े 10 बजे बच्ची का शव मिला। भाई अनिल के मुताबिक अंतिमा की दिमागी हालत ठीक नहीं है। दो साल से उसका इलाज जौनपुर के एक अस्पताल से चल रहा है।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और जुटी भीड़
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इस हृदय विदारक घटना से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया है। हर चेहरे पर बच्चों की मौत का गम साफ नजर आ रहा है। मायके वाले भले ही कह रहे हैं कि मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण महिला बच्चों के साथ कुएं में कूद गई, लेकिन ग्रामीणों के गले के नीचे यह बात उतर नहीं रही है। अंतिमा को उपचार व मेडिकल मुआयना के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।
कुएं में गिरने के बाद अंतिमा अपने बच्चों को पानी में खोजने का प्रयास भी कर रही थी। जब गांव के लोग उसे बाहर निकाल रहे थे तो वह अपने बच्चों के लिए परेशान थी, और उन्हें चीखते हुए खोज रही थी। लेकिन, गांव के लोगों के समझाने पर वो रस्सी के सहारे बाहर आई।