नौ दिनों तक चले नवरात्रि और देवी आराधना के बाद गुरुवार को पूजा समितियों ने गाजे-बाजे के साथ देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया। शुक्रवार को दोपहर तक गोमती नदी के विसर्जन घाट पर खोदे गए तालाब में मां दुर्गा की प्रतिमाएं
विसर्जित की गईं। मूर्ति विसर्जन से पहले सभी पूजा समितियां भंडारी स्टेशन अहियापुर मोड़ पर कतारबद्ध होकर नगर भ्रमण करते हुए विसर्जन घाट पहुंची थी। मूर्ति विसर्जन के दौरान बज रहे देवी गीतों पर लोग नाचते-गाते चल रहे थे।
नवरात्र के अंतिम दिन अहियापुर के पास से दुर्गाप ूजा महासमिति की ओर से पूजन-अर्चन और आरती की गई। इसके बाद डीएम भानुचंद्र गोस्वामी और एसपी राजू बाबू सिंह ने हरी झंडी दिखाकर विसर्जन जुलूस को रवाना किया। जुलूस
धीरे-धीरे सुतहट्टी, कोतवाली पर बने कंट्रोल रूम के सामने से होते हुए चहारसू, शाहीपुल, ओलंदगंज होते हुए विसर्जन घाट पहुंची। यहां एक-एक कर प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया। फलवाली गली की मूर्ति काफी बड़ी थी। इसके चलते
मूर्ति को शाम करीब सात बजे क्रेन की मदद से कुंड में विसर्जित किया गया। जुलूस में ध्वनि विस्तारक यंत्र से बज रहे भक्तिगीत से माहौल भक्तिमय हो गया था। हर कोई मां दुर्गा की भक्ति में लीन नजर आया। पुरुषों के साथ महिलाएं और
बच्चे भी मेले में आए थे। चहारसू चौराहे पर जय मां वैष्णो देवी लंगर समिति अमरनाथ धाम आदि संस्था की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर चल रहा था। जहां से श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। दुर्गापूजा महासमिति के अध्यक्ष शशांक सिंह
रानू आभार व्यक्त किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में रामपुर, बरसठी, जलालपुर, बदलापुर, सतहरिया, महराजगंज, खुटहन, मुंगराबादशाहपुर, मीरगंज, गौराबादशाहपुर, मुफ्तीगंज, धर्मापुर, सिरकोनी, जफराबाद, नेवढिय़ा, सुरेरी, सिंगरामऊ, सुईथाकला,
सूरापुर, सिंगरामऊ, सुजानगंज,मडिय़ाहूं, केराकत, बदलापुर, शाहगंज, मछलीशहर, सिकरारा जलालपुर, मीरगंज, करंजाकला सहित जिले के सभी क्षेत्रों में स्थापित देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।