उन्होंने कहा कि आजकल देश में कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में सामने आ जाता है। कोई अचानक नेता बन जाता है तो कोई संत या संन्यासी बन जाता है। लेकिन केवल वेशभूषा बदल लेने से व्यक्ति का आचरण नहीं बदलता। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति संत का वेश धारण करता है तो उसे उसी के अनुरूप आचरण भी करना चाहिए। समाज में आदर्श प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों की होती है।
शंकराचार्य ने कहा कि भारत की तरक्की तभी संभव है जब लोग अपने धर्म और कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहें। उन्होंने कहा कि धार्मिक मूल्यों को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना और नैतिकता की राह दिखाना है, न कि समाज में विभाजन पैदा करना।
इस दौरान उन्होंने गौ संरक्षण के मुद्दे पर भी राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ माता की रक्षा के प्रति गंभीर है तो उसे जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल घोषणाएं और भाषण देने से गौ माता की रक्षा नहीं हो सकती।
शंकराचार्य ने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी गौवंश की स्थिति चिंताजनक है। सड़कों पर घूमती और उपेक्षा झेलती गाएं इस बात का प्रमाण हैं कि गौ संरक्षण को लेकर अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस और प्रभावी नीतियां बनानी चाहिए।
गौरतलब है कि शंकराचार्य काशी से 'धर्म युद्ध' का आह्वान करते हुए लखनऊ की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाना बताया जा रहा है। उनके बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है और इसे सत्ता और धर्म के संबंधों पर एक नई बहस के रूप में देखा जा रहा है।