शीतला धाम चौकियां में पर्यटन विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। नवरात्र में यहां दर्शन करने के लिए जौनपुर के अलावा अयोध्या, आजमगढ़, सुल्तानपुर, गाजीपुर से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन करने के बाद मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने से मन्नत पूरी होती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस धाम में महंत पद को लेकर दो दावेदारों के सामने आने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रथम पक्ष की बात
विनय तिवारी का कहना है कि वे बीते 15 साल से धाम के महंत हैं। ब्राह्मण समाज ने उन्हें चुना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विवेकानंद पंडा महंत हैं तो इससे संबंधित कागजात अदालत में क्यों प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मंदिर में दो हवन कुंड हैं और दोनों पर सात-सात दिन की पारी लगती है।
दूसरे पक्ष की बात
दूसरी ओर, विवेकानंद पंडा का कहना है कि मंदिर में उनके परिवार की पारी सात-सात दिन में लगती है। साल 1973 में उनके पक्ष में अदालती फैसला आया था। मंदिर में हिस्सेदारी को लेकर एक नया मामला अदालत में लंबित है। उनके चाचा वेदानंद पंडा के निधन के बाद से वह महंत हैं। विवेकानंद पंडा का कहना है कि महंत पद को लेकर असमंजस से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। उन्होंने दो-तीन साल पहले प्रशासन से शिकायत की थी और अब फिर शिकायत करेंगे।
प्रशासन को जानकारी ही नहीं
दोनों के परस्पर विरोधी दावों के बीच महंत पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। वहीं, मुख्य राजस्व अधिकारी अजय कुमार अंबष्ट का कहना है कि धाम में महंत कौन है, इसकी जानकारी लिखित रूप से किसी ने नहीं दी है। विवाद की भी जानकारी नहीं है।