जश्न-ए- ईद मिलादुन्नबी पर दुल्हन की तरह सजे कस्बे में रविवार की शाम अंतिम दिन जलसा गाह में जलसा दस्तार बंदी हुआ। कस्बे के मेन रोड और पुरानी बाजार की दो दर्जन अंजुमनों द्वारा भव्य सजावट की गई।
अंजुमनों को सजावट पर पुरस्कार दिया गया। शायरों ने नातिया कलाम पेश किए। मदरसा अहलेसुन्नत एजाजुल उलूम से हाफिज की तालीम ले चुके तालिब इल्मों की दस्तारबन्दी कर सम्मानित किया गया।
जलसे का आगाज कारी जलालुद्दीन के कुरान की तेलावत से हुई। नात पाक तहजीब रजा, हसीबुर्रहमान, कारी इमरान, जुनेद अहमद, अदनान अत्तारी और तकरीर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद कासिम, शहरयार रजा खान, मौलाना हामिद रजा आदि ने
किया। तकरीर के बाद मदरसा अहलेसुन्नत एजाजुल उलूम से हाफिज की तालीम ले चुके मोहम्मद अनस, मोहम्मद अरमान, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद वामिक की पगड़ी बांध कर दस्तारबन्दी की गई। जलसे की सदारत मौलाना मोहिउद्दीन हस्साम और संचालन मोहम्मद अबसार ने किया।