मौसम के तेवर इस बार काफी बदले हुए हैं। आलम यह है कि जैसा मौसम मार्च में होता है, वह जनवरी में ही महसूस किया जा रहा है। तापमान लगातार वृद्धि पर है। ठंड का एहसास सिर्फ हवाओं के कारण ही हो रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग का असर मान रहे हैं। भविष्य के लिए इसे बड़े संकट का संकेत भी ठहराया जा रहा है।
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आमतौर पर जनवरी का मौसम ठंड वाला ही माना जाता है। सुबह, शाम घने कोहरे और शीतलहर से लोग ठिठुरते रहे हैं। मकर संक्रांति और कई बार तो गणतंत्र दिवस भी ठिठुरते हुए ही बीतता है। इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। जनवरी में ही मौसम में गर्मी फरवरी-मार्च का अहसास करा रही है।
पिछले दस दिनों से लगातार तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है तो न्यूनतम तापमान भी 10 से नीचे नहीं आ रहा। हवाओं की रफ्तार धीमी है। वातावरण में नमी 80 से घटकर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि सुबह और शाम कोहरा भी देखा जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल का कहना है कि गुरुवार को 28 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 12 डिग्री पर बना रहा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में यह बदलाव हो रहा है। इसका असर पौधों के अलावा आम जनजीवन पर भी पड़ेगा। शुक्रवार को तापमान कुछ गिरने की संभावना है। बारिश के आसार 4-5 दिनों तक नहीं है। संभावना है कि इसके बाद कुछ स्थिति सुधरे।