फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन युवकों की संदिग्ध मौत के बाद जागा प्रशासन.....

विज्ञापन
विज्ञापन
खेतासराय। क्षेत्र के महरौड़ा गांव में 24 घंटे के अंदर तीन युवकों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। शुक्रवार की देर रात आननफानन दो अन्य शवों का भी अंतिम संस्कार करा दिया गया। शनिवार को सुबह से ही गांव में सफाई और सैनिटाइजेशन का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया। प्रशासन इन मौतों के पीछे बीमारी को ही कारण मान रहा है, जबकि ग्रामीण आशंकित हैं। तीन युवकों की मौत से गांव में हर तरफ सन्नाटा है।
विज्ञापन

महरौड़ा गांव निवासी लक्ष्मण (25) की बृहस्पतिवार की रात संदिग्ध हाल में मौत हुई थी। इसके कुछ घंटे बाद सफाई कर्मी अरुण कुमार (30) और कंचन (35) ने भी एक-एक कर दम तोड़ दिया। लक्ष्मण का शुक्रवार की सुबह ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था, जबकि अरुण और कंचन का देर शाम प्रशासन की मौजूदगी में दाह संस्कार हुआ। शराब के सेवन से मौत होना बता रहे ग्रामीणों ने पोस्टमार्टम की भी मांग रखी, लेकिन प्रशासन ने कोविड-19 के लक्षण होने का तर्क देते हुए पोस्टमार्टम से साफ इंकार कर दिया। काफी समझाने के बाद परिजनों ने देर रात बिना पोस्टमार्टम के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, जिला अस्पताल में भर्ती अखिलेश (26) की हालत भी गंभीर बनी हुई है। गांव में तीन युवाओं की मौत और चौथे युवक की बिगड़ती हालत से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। शनिवार को सुबह से ही बीडीओ सोंधी अनुराग राय, नायब तहसीलदार अमित सिंह, पंचायत सचिव अजय यादव, प्रभारी चिकित्साधिकारी रमेश चंद्रा, एलटी राधेश्याम टंडन, गुलाब चंद्र की टीम गांव में सफाई व सैनिटाइजेशन में जुटी रही। कैंप लगाकर लोगों की कोविड जांच की कराई गई। हालांकि तमाम ग्रामीण कैंप में जाने से कतराते रहे।
---
लक्षण कोविड के तो अंतिम संस्कार में सावधानी क्यों नहीं
खेतासराय। महरौड़ा गांव में तीन युवकों की मौत के पीछे प्रशासन भले ही बीमारी को कारण बता रहा हो, लेकिन ग्रामीण इससे असहमत हैं। यही कारण रहा कि तीनों युवकों का अंतिम संस्कार सामान्य मौत की तरह ही किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कोरोना से मौत होने पर कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए शव का अंतिम संस्कार कराया जाता है, लेकिन महरौड़ा गांव मेें किसी भी मानक का पालन नहीं हुआ, जबकि जिम्मेदार अफसर भी मौजूद थे। ग्रामीणों का कहना था कि जब अफसर बीमारी से मौत के प्रति आश्वस्त थे तो अंतिम संस्कार में सावधानी क्यों नहीं बरती गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें