जिले के अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाना इस बार और महंगा होगा। कुछ विद्यालयों ने नए सत्र की फीस बढ़ा दी है तो कुछ बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। अनुमानतः हर साल प्रवेश शुल्क के नाम पर सात से 10 प्रतिशत फीस सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों की बढ़ जा रही है। जिससे अभिभावक परेशान हैं।
दाखिला के नाम पर विद्यालय अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों पर फीस को लेकर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वे प्रवेश शुल्क और मंथली फीस अपने हिसाब से तय कर लेते हैं। ऊपर से एनसीईआरटी की किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें चलाकर अभिभावकों के ऊपर और बोझ डाल दिया जाता है। हालत यह है कि कक्षा चार और पांच और छह के छात्रों की किताबें दस से ग्यारह हजार की पड़ रही हैं। इतना ही नहीं पचास फीसदी कमीशन के चक्कर में हर वर्ष नए प्रकाशकों की किताबें लगा दी जाती हैं। अधिकांश विद्यालय संचालक छात्रों को अपने यहां से किताब और कापी भी देना शुरू कर दिए हैं। कुछ ने दुकानदारों को किताबें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंप दी है। जहां से अभिभावकों को मजबूरी में किताबें खरीदनी पड़ती है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक सुरेश कुमार, राधेश्याम और कृपाशंकर गुप्ता आदि कहते हैं कि विद्यालय द्वारा निर्धारित दुकान से किताबों को खरीदना मजबूरी होती है। जो अक्सर ही एनसीईआरटी की बजाय अन्य प्रकाशकों की होती हैं जो महंगी होती हैं।