अभियोजन के अनुसार वादी हरिश्चंद्र रजक ने केस दर्ज कराया कि उसकी मुंगराबादशाहपुर रोडवेज के पास लॉन्ड्री की दुकान है। वह एलआईसी का एजेंट भी है। घटना के एक सप्ताह पूर्व प्रदीप दुबे दो सेट पैंट-शर्ट धुलाई के लिए दिया। दो अगस्त 2009 की शाम प्रदीप उसके दुकान पर आए उसने धुलाई का 20 रुपया मांगा तो प्रदीप अपशब्द कहने लगे। धमकी देकर वापस चले गए।
करीब एक घंटे बाद अपने साथ पिंटू दुबे, कल्लू दुबे और बरसाती यादव के साथ दुकान पर आए। गालीगलौज के साथ मारपीट की और बीमा की किस्त जमा करने के लिए दुकान में रखा सात हजार रुपये भी लूट लिया। दुकान में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। अभियोजन पक्ष से शासकीय अधिवक्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंद श्रीवास्तव ने पैरवी की।
कोर्ट में वादी एवं अन्य गवाह घटना से मुकर गए। कहा कि एक ग्राहक अपना कपड़ा लेने आया था, उन्हें कपड़ा देने के लिए बाहर आया तभी उधर से आ रही रोडवेज बस से धक्का लग गया, जिससे गिरने से उसे चोटें आईं। आरोपियों ने न तो मारा पीटा, न गालियां दी, न लूटपाट किया। कोर्ट ने चारों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।