इसके उलट उपचुनाव में बसपा को सिर्फ 25180 वोट ही मिले। प्रत्याशी को जमानत भी गंवानी पड़ी। 22 बूथ ऐसे रहे, जहां बसपा का खाता भी नहीं खुल सका। पचास से भी अधिक बूथों पर दहाई का आंकड़ा भी पार्टी नहीं छू सकी। बसपा की इस दुर्गति की खबर अमर उजाला ने 12 नवंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद हरकत में आए पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा शुरू की।
हार का ठिकरा प्रत्याशी पर फोड़ते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। वाराणसी मंडल के मुख्य सेक्टर प्रभारी अमरजीत गौतम का कहना है कि उपचुनाव को प्रत्याशी ने गंभीरता से नहीं लिया। संगठन के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हुए वरिष्ठ पदाधिकारियों के समझाने के बाद भी सुधार नहीं किया। मनमाने ढंग से निष्क्रिय होकर कार्य करते रहे।
चुनाव प्रचार के लिए वाहनों की झूठी संख्या बताई जाती रही। कार्यक्रमों में भी कोई ब्राह्मण मतदाता नहीं पहुंचता था। कई गांवों में प्रत्याशी गए भी नहीं। मल्हनी में पार्टी को हमेशा से 45-50 हजार वोट मिलते रहे हैं, लेकिन प्रत्याशी की निष्क्रियता से यह आधे हो गए। समीक्षा के बाद पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर जयप्रकाश दुबे को निष्कासित कर दिया गया है।