शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की पूजा की गई। दर्शन पूजन के लिए मंदिरों में भारी भीड़ देखी गई। देवी चंद्र घंटा सरस्वती की स्वरूप हैं।
असुर संग्राम में घंटा से तमाम असुरों का विनाश किया था। जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा रख दिया। शहर और गांवों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन पूजन के लिए देर रात तक लोगों की भीड़ लगी रही। शाम होते ही दर्शन
पूजन के लिए पंडालों में भीड़ उमड़ पड़ी। देवी गीतों से शहर समेत गांव में पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। नवीन नव दीप संस्था नखास द्वारा इस बार मिट्टी की मूर्ति नहीं स्थापित की गई। सस्था की ओर से इसबार थर्माकोल, फ्लैक्स मोती, खाने
वाले रंग का प्रयोग करके मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान कार्तिकेय व श्रीगणेश की मूर्ति बनाई गई है। संस्था के पूर्व अध्यक्ष सूरज निषाद, राजू चौधरी, डा. कमलेश व विकास निषाद ने पिछले एक माह से अथक परिश्रम करके मूर्तियों का
निर्माण किया है। मूर्तियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित हो रही है। संस्थाध्यक्ष संजय प्रकाश जायसवाल व महासचिव विजय मौर्य ने बताया कि संस्था न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए यह पहल की गई है।