सुजानगंज। पत्नी और बच्चों को ससुराल छोड़कर घर लौट रहे ट्रांसपोर्टर महेंद्र पांडेय की मौत कई सवाल भी छोड़ गई है। दाहिने हाथ-पैर से अशक्त होने के बाद भी 15 किमी दूर से गाड़ी लेकर सकुशल आए महेंद्र के आग लगने के बाद वाहन से बाहर निकल पाने में असमर्थता गले से नीचे नहीं उतर रही। हर 10-15 किमी पर गाड़ी गर्म होने की जानकारी होने के बाद भी रात के अंधेरे में अकेले सफर का जोखिम लेना भी समझ से परे है। घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।निवासी महेंद्र पांडेय ने कुछ वर्षों पहले एक हादसे में अपना दायां हाथ और पैर गंवा दिया था। बावजूद कभी हार नहीं मानी। वह आत्मनिर्भर था और अपने बूते ही ट्रांसपोर्ट के कारोबार को सकुशल संचालित कर रहा था।
लॉक डाउन में गांव आने के बाद भी वह खुशमिजाज ही था। वह एक हाथ और पैर से भी सारे काम सुचारू रूप से कर लेता था। ऐसे में चलती कार में आग लगने के बाद गेट से बाहर न आ पाने की विवशता किसी को समझ नहीं आ रही। जानकारों की मानें तो आग पहले अगले हिस्से में लगी होगी। पूरे वाहन को लपटों में घिरने में कम से कम 5-7 मिनट का वक़्त लगा होगा, इतने में वाहन से बाहर निकला जा सकता था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि जिस जगह घटना हुई, वहां सड़क पर गड्ढा है। ऐसे में यह भी मुमकिन है कि वाहन गड्ढे में फंस गया हो। महेंन्द्र ने स्पीड बढ़ाकर उसे बाहर निकालने की कोशिश की हो और उसी दौरान वायरिंग शॉर्ट कर गई हो। ग्रामीणों के मुताबिक टायर फटने की आवाज से पहले भी कई बार हॉर्न बजने की आवाज आयी थी, मगर मुख्य मार्ग पर हर वक़्त वाहनों की आवाजाही के कारण किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर हॉर्न की आवाज पर भी लोग समय पर पहुंचे होते तो स्थिति कुछ और होती। बहरहाल, तमाम चर्चाओं के बीच हर कोई इस हृदय विदारक घटना से स्तब्ध है।