सरकार भले ही स्वच्छता के लिए नित नई कवायद कर रही हो, लेकिन जिम्मेदार शासन की मंशा को परवान चढ़ाने में लापरवाही बरत रहे हैं। शहर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनवाए गए अधिकांश शौचालयों में या तो गंदगी की भरमार है या फिर उसके दरवाजा व यूरिनल आदि टूटे हुए हैं। जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोग इन शौचालयों का उपयोग करने से भी हिचक रहे हैं, जिससे शौचालय उद्देश्य विहिन साबित हो रहे हैं।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में नगर पालिका की ओर से लाखों रूप ये खर्च कर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इस दौरान कुल 24 सामुदायिक शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन इसमें से कई शौचालय आज भी बंद पड़े हैं तो कईयों में गंदगी है और कईयों का दरवाजा आदि टूटा पड़ा है। इस दौरान मंडी नसीब खां मोहल्ले में बना सामुदायिक शौचालय में जहां गंदगी की भरमार है। वहीं दरवाजा भी टूटा पड़ा है। पालिटेक्निक चौराहा स्थित सामुदायिक शौचालय का यूरिनल टूटा हुआ है। भंडारी मोहल्ले में बना सामुदायिक शौचालय में गंदगी की भरमार है। ईशापुर मोहल्ले में बना सामुदायिक शौचालय का दरवाजा व यूरिनल टूटा हुआ है, जिसके कारण शहरवासियों के साथ ही शहर में आने वाले अन्य लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।