शहर के सभी नालों की सफाई का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अभी भी 50 फीसदी नालों के सफाई का कार्य होना बाकी है, जिसके लिए जिम्मेदारों के पास महज 23 दिन का समय बचा है। कारण कृषि वैज्ञानिको की मानें तो 20 जून के बाद मानसून दस्तक दे देगा। ऐसे में अगर समय रहते जिम्मेदारों ने नालों की सफाई का कार्य पूरा नहीं किया तो शहर में जलभराव होगा, जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। वहीं संक्राक बीमारियों से भी लोग ग्रसित होंगे।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 50 नाले हैं, जिसमें 14 बड़े और 36 छोटे नाले हैं, जो शहर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में मौजूद है, लेकिन सफाई के अभाव में यह नाले बजबजाते रहते हैं। कारण इन नालों की सफाई करने का कोई तय समय नहीं है। साल में एक बार सफाई कराकर नगर पालिका शांत बैठ जाता है, जिससे नाला जाम होता है और गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। बारिश के समय उसका पानी भी बाहर नहीं निकल पाता है, जिससे बारिश के समय शहर में जलभराव की स्थिति भयावह हो जाती है। हालांकि इस इस बार बारिश के समय शहर में जल भराव की स्थिति नहीं हो पाए, इसके लिए नगर पालिका प्रशासन बीते 15 अप्रैल से शहर के नालो के सफाई करा कार्य शुरू किया है, लेकिन अभी तक तहज 25 नालों की ही सफाई करा सका है। अभी भी शेष 25 नालों की सफाई कराया जाना बाकी है, जिसमें चांदीमारी, वाजिदपुर दक्षिणी, मुल्लाह टोला, सिपाह, बलुआघाट, कलीचा बाद आदि स्थानों के नाले हैं, जिनकी सफाई अभी कराया जाना बाकी है।