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ब्लॉक में सूख गए हजारों पौधे, कागजों में हुआ रोपण

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32- सुईथाकला ब्लाक परिसर में सूखे पड़े पेड़। - फोटो : JAUNPUR
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सुईथाकला। पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए सरकार के सघन पौधरोपण अभियान को जिम्मेदारों ने पलीता लगा दिया है। सुईथाकला ब्लाक क्षेत्र में आए हजारों पौधे रोपण के इंतजार में ही सूख गए। खुले आसमान के नीचे रखे पौधों की सुरक्षा न होने से कुछ पशुओं का निवाला बन गए तो कुछ समुचित देख-रेख न होने से सूख गए। हैरानी की बात है कि कागजों में इन पौधों का रोपण कर मजदूरी और सुरक्षा का पैसा भी डकार लिया गया। अब पोल खुलने के बाद जिम्मेदार लीपापोती में जुटे हैं।
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जून-जुलाई में सघन पौधरोपण अभियान के तहत सुईथाकला ब्लाक को 1.34 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। वन विभाग और निजी नर्सरियों के माध्यम से इसकी आपूर्ति भी कर दी गई। मनरेगा के तहत इन पौधों का रोपण होना था। गड्ढा खोदाई और उसकी देख-रेख की मजदूरी भी देने की व्यवस्था थी। गड्ढा खोदाई पर 60.19 लाख और मजदूरी के एवज में 4 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से करीब 11 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। कागजों में तो पौधरोपण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया, लेकिन धरातल पर सैकड़ों पौधे गांवों तक पहुंच ही नहीं सके। इन्हें ब्लाक परिसर में ही एक किनारे रखकर छोड़ दिया गया। देख-रेख न होने से कुछ पौधों को पशु चट कर गए तो अधिकांश सूख गए। अब यह इसी हाल में ब्लाक परिसर में ही पड़े हुए हैं। इस बाबत मनरेगा के एपीओ अंकित सिंह का कहना है कि रोपाई के लिए पौधे वन विभाग ने दिए थे। गड्ढा खोदने और मजदूरी का खर्च दिया गया है। ब्लाक परिसर में नर्सरी विकसित करने के लिए पौधे रखे गए हैं। कोई पौधा सूखा नहीं है। उधर, प्रभारी बीडीओ और जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी आरडी यादव का कहना था कि ब्लाक क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। पौधों का सत्यापन चल रहा है। करीब 46 प्रतिशत पौधे जीवित मिले हैं। जो पौधे सूख गए, उनकी लंबाई छह इंच से कम थी। जांच कराई जा रही है।
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