जौनपुर। बारिश शुरू होते ही नदियों का जलस्तर बढ़ने लगता है, जो अभी से ही शुरू हो गया है। गोमती नदी का पानी बढ़ गया है। घाट विसर्जन घाट की तरफ से हो रहा घाट डेवलपमेंट कार्य डूब गया है। हालांकि काम अभी ऊंचाई वाले स्थानों पर चल रहा है। वहीं, प्रशासन भी बाढ़ से निबटने के लिए तैयारी पूरी कर ली है। इस बार 47 गोताखोर और 127 नाविकों को तैनात किया गया है। वहीं, 88 स्थानों पर बाढ़ चौकी बनाई गई है। बाढ़ में जनपद के 239 निचले इलाके वाले गांवों में खतरा मंडराने लगता है।
जनपद से होकर गोमती, सई, पीली, बसुई और वरुणा नदियां गुजरी हैं, जो विभिन्न इलाकों से होते हुए अन्य जनपदों से गुजर रही हैं। बारिश के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है। इससे नदी के समीप निचले गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। अगर बाढ़ आई तो तकरीबन 6326 हेक्टेयर क्षेत्रफल का भाग प्रभावित होगा। साल 1980 में आई बाढ़ में करीब इतना ही क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था, जिसे आज भी लक्ष्य बनाकर बाढ़ से निपटने की तैयारी प्रशासन ने की है। बाढ़ आने पर सबसे पहले शहर से गुजरी गोमती नदी के निचले हिस्से के तटीय इलाकों के अलावा केराकत, चंदवक और बदलापुर क्षेत्र में खतरा मंडराने लगता है। इन क्षेत्रों के तकरीबन 144 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ से प्रभावित होते हैं। कारण यह गांव नदियों के किनारे व आस-पास बसे हैं। बाढ़ आने पर सबसे पहले शहर क्षेत्र के मियापुर, बलुआघाट. चकप्यारअली तो केराकत तहसील में चंदवक, बंबावन, हरिहरपुर, भैंसा, बरहपुर, बलरामपुर, घुड़दौर, पोखरा, केवटली, तुरकौली, देवरहा, सराय पड़री, फत्तुपुर और मोलनापुर आदि गांव ज्यादा प्रभावित होते हैं।
जिले में 1980 में आई थी बाढ़
जौनपुर। जिले में वर्ष 1985 में बाढ़ आई थी, जिसमें काफी जन धन की हानि हुई थी। इसके बाद जिले में अभी तक उतनी भीषण बाढ़ नहीं आई है। हालांकि हर साल गंगा का जल स्तर बढ़ने से गोमती नदी में दबाव बढ़ता है। गोमती का जलस्तर पर बढ़ने पर केराकत व बदलापुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ आती है, लेकिन सिर्फ खेत व फसलें ही डूबती हैं। पिछले साल कई इलाकों के लोगों की घरों तक में पानी घुस गया था। इसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार मई माह में ही बैठक कर बाढ़ से निबटने की तैयारी पूरी कर लिया है।
बाढ़ आने पर 33 हजार लोगों के प्रभावित होने की आशंका
जौनपुर। पिछले साल भी बाढ़ प्रभावित 239 गांवों को चिह्नित किया गया गया था। साथ ही 6326 हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित होने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। साथ ही 33,708 लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए 47 गोताखोर, 127 नाविक और 58 बाढ़ चौकियां बनाई गई थीं। इसमें शहर को दो जोन में बांटा गया है, जिसमें उत्तरी क्षेत्र में 11 और दक्षिणी क्षेत्र में 9 स्थान बाढ़ चौकी बनाने के लिए चिह्नित किए गए हैं।
किस नदी के तट पर कतने निचले इलाके
जौनपुर। जिले के सभी तहसीलों के 239 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है। इसमें सदर तहसील में गोमती नदी से 56 और सई नदी से 23, मडि़याहूं तहसील में सई नदी से 18 व बसुई नदी से 7, मछलीशहर तहसील में सई नदी से 15 व बसुई से 12, शाहगंज तहसील में गोमती नदी से चार, केराकत तहसील में सई, गोमती व पीली नदी से 73, बदलापुर तहसील में सई, गोमती से 31 गांवों के प्रभावित होने की संभावना के मद्देनजर कार्ययोजना तैयारी की जाती है।
बाढ़ से बचाव और राहत कार्य के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बैठक कर बाढ़ के मद्देनजर सारी तैयारी पूरी करने को लेकर चर्चा भी की जा चुकी है। सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने और एसडीएम और तहसीलदार को भ्रमण कर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। ताकि बाढ़ आने पर नुकसान से बचा जा सके। - राम प्रकाश एडीएम