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बसों के साथ ही थम गया जिंदगी का पहिया भी

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04- रोडवेज परिसर व सड़क पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। दोपहर की तपती धूप और गर्म हवा के थपेड़ों के बीच रोडवेज डिपो परिसर सांय-सांय कर रहा था। न बसों घरघराहट और न यात्रियों की आपाधापी और न मूंगफली, नारियल, फल, पानी बेचने वालों का कलरव। नीरव सन्नाटा ही परसा रहा।
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डिपो के ठीक सामने चाय-नाश्ते की जिन दुकानों पर पौ फटते ही तलब मिटाने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती थी, उनके चूल्हे महीने भर से ठंडे हैं। टीडी कॉलेज रोड से रोडवेज होते हुए कलेक्ट्रेट को जाने वाली दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा है। ऐसा लग रहा है 40 दिनों से बसों की ही तरह जिंदगी का पहिया थम गया है।
जौनपुर रोडवेज डिपो में 83 सरकारी और सात अनुबंधित बसें हैं। यह लखनऊ, वाराणसी आजमगढ़, गोरखपुर, दिल्ली, कानपुर सहित अन्य रूटों पर दौड़ती हैं। सुबह से शाम तक कोई ऐसा वक्त नहीं होता, जब रोडवेज डिपो में चहल-पहल न हो। स्टैंड पर खड़ी होकर बसें हर वक्त यात्रियों की प्रतीक्षा करती ही नजर आती थीं। परिसर में घुसते ही परिचालक की आवाजें गूंजने लगती थी तो कभी ड्राइविंग सीट पर बैठा चालक हार्न बजाकर मंजिल की ओर तेजी से चलने का इशारा करता रहता। लॉक डाउन के बाद से यहां की तस्वीर भी बदल गई है। चहलपहल खत्म है। स्टैंड से दूर बसें एक तरफ खड़ी हैं। किसी को कहीं जाने की जल्दी नहीं है। यात्री भी इधर का रास्ता भूल चुके हैं। इमरजेंसी सेवा में लगे चालक-परिचालक को छोड़ दें तो रविवार को यहां कोई नहीं था। यह सभी भी रेस्ट रूम में आराम फरमाते रहे। कनिष्ठ लिपिक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 24 मार्च के बाद से बसों का संचालन ठप है। क्वारंटीन में रखे गए लोगों को घरों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कुछ बसों की जरुरत बताई थी, इसलिए कुछ चालक-परिचालक को शिफ्टवार ड्यूटी पर लगाया गया है। बाहर से यात्रियों को लेकर आने वाली बसें सीमा पर ही बदलापुर या मुंगराबादशाहपुर में यात्रियों को उतारकर चली जा रही हैं। इमरजेंसी ड्यूटी में ही तैनात चालक हंसराज यादव ने बताया कि अचानक से कभी बस लेकर जाने का फरमान आ सकता है। इसलिए यहां उपस्थित रहते हैं। वैसे अब तक ऐसी नौबत नहीं आई।
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40 दिनों से बंद है चाय-नाश्ते की दुकानें
रोडवेज डिपो परिसर के सामने ही आधा दर्जन चाय, नाश्ता, भोजन की दुकानें हैं। जब से लॉक डाउन हुआ है, इन दुकानों पर भी ताला चढ़ा हुआ है। यहां काम करने वाले मजदूर अपने घरों को जा चुके हैं। इनका व्यवसाय रोडवेज डिपो पर ही निर्भर था। बसों का आवागमन ठप होन के बाद से इनकी आमदनी भी प्रभावित है। नाश्ते की दुकान चलाने वाले राकेश ने बताया कि अभी तो सब कुछ बंद ही चल रहा है। कुछ दिनों तक तो भोजन बनाने वाले मजदूरों को रखा गया, लेकिन जब लॉक डाउन बढ़ने लगा तो उन्हें घर जाने के लिए कह दिया। अब आगे स्थिति जैसी होगी, व्यवस्था की जाएगी।
लॉक डाउन के बाद से बसों का संचालन ठप है। शासन के निर्देशानुसार समय-समय पर बसों का सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है, ताकि जरुरत पड़ने पर उसे कहीं भेजा जा सके। इमरजेंसी सेवा के लिए तीन-तीन कर्मचारियों को लगाया गया है, जिससे डिपो की सुरक्षा हो सके और भूले-भटके यहां आने वालों को सही जानकारी दी जा सके। संचालन को लेकर अभी कोई निर्देेश नहीं मिला है। -विजय कुमार श्रीवास्तव, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो।
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