मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले की जांच कर रही एमपी एसटीएफ जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के भोगीपुर कठार गांव के आरोपी चाचा के बजाए उसके भतीजे को ही उठा ले गई।
मध्य प्रदेश की एसटीएफ जिस किशोर को यहां से ले गई है उसके घर वालों ने सोमवार को एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। कहा कि आखिर गुनाह किसी और ने किया और सजा किसी और को क्यों दी जा रही है।
महराजगंज थाना क्षेत्र के भोगीपुर कठार गांव निवासी मो. कलीम कानपुर के एक कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाला मामले की जांच कर रही एसटीएफ की जांच में मो. कलीम का भी नाम सामने आया है।
मो. कलीम की गिरफ्तारी के लिए वहां की एसटीएफ 30 मार्च से लेकर नौ जून के बीच छह बार भोगीपुर कठार गांव आकर दबिश दी, लेकिन मो. कलीम नहीं मिला।
वह उस कालेज से भी गायब हो गया है जहां से एमबीबीएस कर रहा था। नौ जून को छठवीं बार यहां आई एमपी की एसटीएफ, महिला पुलिस बल के साथ पहुंची थी। घर के अंदर तक तलाशी ली।
आरोपी युवक नहीं मिला तो उसके भतीजे शहंशाह (15) को उठा ले गई। शहंशाह की मां जमीला अंसारी सोमवार को ग्रामीणों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर पत्रक सौंपा।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक से कहा कि उनका बेटा नाबालिग है और कलीम के परिवार से वह कई सालों से अलग रहती है। बावजूद इसके भी एसटीएफ रात में छापेमारी कर उनके बेटे को उठा ले गई। उसने आरोप लगाया है कि एमपी एसटीएफ गलत तरीके से उनके बेटे को बंधक बनाए हुए है।