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नौकरी नहीं जेहन में था देश सेवा का भाव

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11- पूविवि के आर्यभट्ट सभागार में प्रो राजेन्द्र सिंह रज्जू भैय्या की जयंती के मौके पर बोलते अतिथि - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। युवा एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य शतरुद्र प्रताप सिंह ने कहा कि रज्जू भैय्या बहुत संवेदनशील अन्त:करण के साथ-साथ घोर यथार्थवादी भी थे। वे किसी से भी कोई भी बात निस्संकोच कह देते थे और उनकी बात को टालना कठिन हो जाता था। उन्होंने अंग्रेजों की नौकरी न करके शिक्षक बनना स्वीकार किया। बाद में उन्होंने शिक्षक की भी नौकरी छोड़कर समाज और देश सेवा करने का फैसला किया। उनकी प्राथमिकता में नौकरी कभी नहीं थी उन्होंने देश को सबसे ऊपर माना।
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वह बुधवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के रज्जू भइया भौतिकीय विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान के आर्यभट्ट सभागार में बुधवार को प्रो. राजेन्द्र सिंह रज्जू भैय्या की जयंती पर प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया ) देश की वर्तमान चुनौतियां विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि रज्जू भैया ने युवाओं में राष्ट्र भावना पैदा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। देश में हो रहे परिवर्तन से उपजी समस्याओं और चुनौतियों का सामना करने के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों को आगे आना होगा। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि रज्जू भैया सचमुच संघ परिवार के न केवल बोधि-वृक्ष अपितु सबको जोड़ने वाली कड़ी थे। वह जटिल से जटिल विषयों को भी सरलता के साथ प्रस्तुत करते थे। यही नहीं शिक्षा मंदिर के लिए उन्होंने प्रयागराज में अपने परिवार की संपत्ति भी दान में दे दी। इसके पूर्व संस्थान के निदेशक प्रो.देवराज सिंह ने रज्जू भैया का संक्षिप्त जीवन परिचय पढ़ा।
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प्रो. बीबी तिवारी ने और अतिथियों का स्वागत एनएसएस के समन्यवक राकेश यादव ने किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता जितेंद्र शुक्ला ने रज्जू भैया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. एके श्रीवास्तव, डॉ. अजय प्रताप सिंह, डा. प्रमोद यादव, डा. राजकुमार, डा. मनोज मिश्र, डा. श्याम कन्हैया सिंह, डा. गिरधर मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. पुनीत धवन, डा. नीतेश जायसवाल, डा. अजीत सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डॉ अनुराग मिश्र आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डा. संतोष कुमार और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक डॉ मनीष गुप्ता ने किया।
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