जौनपुर। विद्यालयों में फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी करने वालों का पता लगाने के लिए शासन के निर्देशों पर शुरू हुई जांच अभी जिले में ही अटकी हुई है। दो माह बाद भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए नहीं भेजा जा सका है। सूत्रों की मानें तो करीब 10 फीसदी शिक्षकों ने बार-बार हिदायतों के बाद भी दस्तावेज जमा नहीं किया है। इसमें कुछ अफसरों के चहेते भी हैं। हालांकि बीएसए इस देरी के लिए 69 बिंदुओं के प्रारुप के अनुरुप सूचनाएं संकलित करने को कारण बता रहे हैं। उनकी दलील है कि जल्द ही शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए संबंधित संस्थान को भेज दिया जाएगा।
विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच के लिए शासन के निर्देश पर जून के पहले पखवारे में ही जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। परिषदीय, सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र संबंधित ब्लाक के बीईओ घकार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक जिले में परिषदीय विद्यालयों में 9962 शिक्षक तैनात हैं, जबकि अनुदानित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की संख्या 645 है। इनके अलावा 3319 शिक्षामित्र और 717 अुदेशकों की भी जांच होनी है। 19 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात सभी वार्डेन और 160 शिक्षिकाओं के दस्तावेजों की जांच के लिए उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों को पहले ही जमा कराया जा चुका है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी 10 फीसदी शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अपने सभी प्रपत्र जमा नहीं किए हैं। बार-बार हिदायत के बाद भी वह हीलाहवाली कर रहे हैं। इससे उन पर शक गहराता जा रहा है। बावजूद अफसर उन पर मेहरबान बने हुए हैं। शासन का सख्त निर्देश है कि अवैध रूप से नौकरी करने वाले शिक्षकों को न सिर्फ नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन के रूप में ली गई सारी रकम की वसूली की जाएगी। जिले में पहले भी फर्जी शिक्षकों की तैनाती का खुलासा हो चुका है। ठीक से जांच हुई तो सैकड़ों की संख्या में फर्जी शिक्षक जेल जा सकते हैं।
सभी शिक्षकों के शैक्षिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्रों से मिलान के बाद छायाप्रति जमा करा ली गई है। डाटा बेस भी तैयार कर लिया गया है। 69 बिंदुओं पर सूचना तैयार कर प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए संबंधित संस्थान को भेजाजा जाएगा। स्टाफ की कमी के चलते सूचनाएं संकलित करने में वक्त लग रहा है। कोशिश की जा रही है कि इसी सप्ताह प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए भेज दिया जाएगा।
-प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए।