जलालपुर। ऐतिहासिक त्रिलोचन महादेव में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को त्रिलोचन महादेव मंदिर में एक ऐसा आध्यात्मिक अलौकिक दृश्य उपस्थित हुआ, जिसने उपस्थित हर शिवभक्त का हृदय मथ दिया। देवों के देव महादेव की श्रावण मास के अंतिम शयन आरती के दिव्य क्षणों में ऐसा भक्ति प्रवाह उमड़ा कि संपूर्ण मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष और भक्तों के अश्रुओं से सराबोर हो गया। संध्या काल से ही मंदिर परिसर में तिल रखने की जगह नहीं थी।
मध्यरात्रि के करीब जब बाबा त्रिलोचन महादेव का विशेष शृंगार, महाभोग और उसके उपरांत शयन आरती प्रारंभ हुई, तो डमरू की डिम-डिम, घंटे-घड़ियाल की गूंज और कपूर की महक से पूरा वातावरण शिव मय हो उठा, जैसे ही शयन आरती की दिव्य ज्योति बाबा के अलौकिक विग्रह के समक्ष घूमी, भजनों की स्वर लहरी पर भक्त भाव-विभोर होकर झूमने लगे। आध्यात्मिक चरम के इस क्षण में कई भक्तों की आंखों से प्रेमाश्रुओं की धारा बह निकली। बाबा को श्रावण मास की अंतिम सोमवार की विदाई अगले वर्ष तक के लिए विशेष अनुष्ठान समापन देते समय मंदिर के प्रबंधक मुरलीधर गिरी मंदिर के मुख्य पुजारी सोनू गिरी तथा एक माह से त्रिलोचन महादेव की सेवा में लगे पुजारी सोनू गिरी, अभय गिरी, राहुल गिरी, प्रिंस गिरी, प्रवीण गिरी भैया लाल यादव, सेवक ओंकार गिरी राहुल गिरी अशोक गिरी मिंकु सिंह, अजय गिरी, सूरज गिरी,के साथ लगे भक्तों का हृदय भर आया।
वृद्ध हो या युवा, हर कोई हाथों को जोड़े, नयन बंद किए बाबा के शयन रूप का ध्यान धरकर बस अश्रु बहाता दिखा। मंदिर के प्रधान पुजारी ओंकार गिरी के अनुसार, श्रावण के अंतिम सोमवार की शयन आरती का आध्यात्मिक महत्व विशेष है।