जौनपुर। सावन की अमावस्या और तीसरे सोमवार को मेघों ने भी भगवान भोलेनाथ का खूब जलाभिषेक किया। भोर से ही शुरू हुई बारिश छह घंटे तक जारी रही। इससे उमस भरी गर्मी से राहत मिली तो शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी पैदा हो गई है। स्कूलों, सरकारी दफ्तरों के परिसरों में भी जलभराव हो गया। पुराने भवनों की छत टपकने से कार्यालयों में कामकाज बाधित हुआ।
बारिश का क्रम भोर में साढ़े चार बजे से ही शुरू हुआ। गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश ने मौसम को सुहाना कर दिया। सुबह से ही बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित रहा। दो दिनों की बंदी के बाद सोमवार को दुकान खोलने के लिए बेताब दुकानदार बारिश के कारण देर से पहुंचे। सोमवार पर शिवालयों में जाने वालों को भी इंतजार करना पड़ा। सुबह करीब साढ़े 10 बजे बारिश बंद होने के बाद लोग कामकाज पर जा सके।
झमाझम बारिश से शहर के नईगंज, कालीकुत्ती, मछलीशहर पड़ाव, सिद्दीकपुर सहित कई मोहल्लों में पानी भर गया। कलेक्ट्रेट स्थित डाकघर, डूडा कार्यालय, पुराने तहसील भवन की छतों से पानी टपकने के चलते कर्मचारी परेशान रहे। खेतों भी पानी भर गया है। लगातार धूप और गर्मी के चलते सिंचाई के लिए परेशान किसानों को इससे राहत मिली। खुटहन कस्बा में भी जलभराव से लोग परेशान रहे। चौराहे से पट्टीनरेंद्रपुर मार्ग पर पानी भर गया। इससे आवागमन में परेशानी हुई। किसानों का कहना है कि बारिश धान की फसलों को फायदा हुआ लेकिन उड़द, ज्वार, बाजरा, तिल, अरहर और मक्का को नुकसान की आशंका है।
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विद्यालय परिसर और कमरों में लगा पानी
धर्मापुर। ब्लॉक क्षेत्र के संविलियन विद्यालय पंचहटिया में सोमवार को हुई तेज बारिश से बरसात का पानी विद्यालय परिसर, कमरों और दफ्तर में घुस गया। विद्यालय पहुंची प्रधानाध्यापिका अर्चना देवी ने बताया कि हल्की बारिश होने पर भी कैंपस में और विद्यालय के कमरों तक पानी पहुंच जाने से स्टाफ को बैठने में फजीहत होती है। कई बार इस समस्या से नगर पालिका को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक विद्यालय की जल निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं किया जा सका है।
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जलसंरक्षण का उपाय करें प्रधान
जौनपुर। बारिश को देखते हुए डीएम ने सभी ग्राम प्रधानों को जलसंरक्षण के लिए समुचित इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्राम प्रधानों से कहा कि मनरेगा के तहत गांवों में खोदे जा रहे तालाब में वर्षा जल संचयन के लिए सभी प्रधान उपाय करें। गांवों में ढलान इस तरह बनाया जाए, जिससे बारिश का पानी सीधे तालाब में पहुंचे। जल संरक्षण का यह उचित मौका है। इसका निकट भविष्य में जलस्तर सुधारने में लाभ मिलेगा।