भगवान और भक्त के बीच के भक्ति का एक ही मात्रा नाता होता है। भक्त को बहुत प्रकार नहीं, भक्ति के केवल एक पथ का चुनाव समय रहते कर लेना चाहिए। मनुष्य का मूल कार्य है सत्कर्म में लगे रहना, लेकिन अधिसंख्य लोग मूल को ही भूलकर बैठ जाते हैं। यह बातें शनिवार को बीआरपी मैदान में आयोजित सात दिवसीय रामकथा में प्रेमभूषण महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि भगवान और सत्कर्मों में जिसकी जितनी श्रद्धा होती है, उतना ही हमारा कल्याण भी होता है। मनुष्य को संसार की चर्चा और चिंता करने से पहले स्वयं के बारे में विचार करने की जरूरत है। हमें अपने स्वयं के लिए भगवान के आश्रय में जाने की आवश्यकता होती है किसी और के लिए नहीं। भक्ति पथ पर रहने के लिए ही निरंतर भगवान की कथा का श्रवण करना आवश्यक है। केवल जगदीश में रहने से ही कल्याण होगा। रामकथा के अंतिम दिन कथा शुरू होने से पहले मुख्य यजमान ज्ञान प्रकाश सिंह ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन किया और भगवान की आरती उतारी। तत्पश्चात कथा शुरू हुई। पूर्णाहुति सत्र में भगवान श्रीराम राज्याभिषेक की झांकी अद्भुत सजाई गई थी। हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने खूब बधाइयां गाई और नृत्य किए। महाराज ने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी सारा कार्य छोड़ कर भगवान राम के कार्यों को ही पूरा करने में हमेशा लगे रहते थे। इसी प्रकार मनुष्य को अपना जो कार्य है निष्ठा और लगन से करना चाहिए।जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने भी व्यासपीठ की आरती उतारी। यह कथा सेवाभारती के बैनर तले चल रही है। इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमला सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत सिंह, अरविंद सिंह, संजय पांडेय, डॉ. आरएन त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।