सिंगरामऊ। पंचायत चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण निर्धारित होते ही भावी प्रत्याशी गांव में प्रचार प्रसार तेज कर दिए हैं। वर्तमान समय में चट्टी चौराहों पर चुनावी चर्चा तेज हो गई है। इतना ही नहीं गांव के हर गलियों, हर बाजारों तथा हर वार्ड में जाकर मतदाताओं के घर हाजिरी लगाई जा रही है। ग्रामीणों की सेवा में जुटे प्रधानी के दावेदार जिसके घर में जितने वोट, उसकी उतनी सेवा कर रहे हैं। वोटर किस तरह से अपने खेमे में आएंगे इसके लिए हर प्रयास जारी है।
सिंगरामऊ थाने के बगल स्थित किताबू की चाय की दुकान पर चर्चा जोरों पर है। कवेली गांव निवासी अभिषेक कुमार कहते हैं कि जो भी दावेदार आ रहा है, उसके साथ हां में हां मिला रहे हैं। वोट देना तो बाद की बात है। जुबान से अभी किसी को नाराज क्यों करें। ग्राम पंचायत दयालापुर निवासी रामभवन मौर्य का कहना था अब तक हमारे घर में आधा दर्जन लोग अपनी उम्मीदवारी जताने आ चुके हैं। मतलब जो कभी भी हालचाल नहीं पूछते थे, वो नेता जी लगातार बड़े-बुजुर्गों के चरणवंदना किए जा रहे हैं। कई दावेदारों की होर्डिंग से राजनीतिक पार्टी के नेताओं के भी फोटो नजर आने लगे हैं, लेकिन असल चुनाव लड़ाई गांव के अंदर लड़ी जानी है। पांच साल तक सीधे मुंह बात न करने वाले प्रधान लोगों के घर-घर जाकर दिक्कतें पूछ रहे हैं। दूसरी बार प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक नौजवान ने नाम न छापने की शर्त कहा कि प्रधानी का चुनाव सांसदी (लोकसभा) से ज्यादा मुश्किल है। एक-एक वोट का हिसाब रखना और उसको बात-बात समझानी है। पिछले एक साल से हमारा पूरा समय इसी में जा रहा है। बस गांव वालों की सेवा में लगे हैं।