मकर संक्रान्ति के की पूर्व संध्या पर लाई चूड़ा इत्यादि की खरीदारी करते लोग।
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जौनपुर। स्नान-दान का पावन पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को जिले में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए बुधवार को नदी-तालाब के घाटों से लेकर घरों में तैयारियां जोरों पर रहीं। घरों में महिलाएं गुड़-तिल की मिठाई बनाने में मशगूल रहीं तो बच्चे पतंगबाजी की तैयारी में रहे। बाजारों में भी इससे जुड़े सामानों की दुकान पर दिन भर खरीदारों की भीड़ रही। बहन-बेटियों के घर खिचड़ी पहुंचाने के लिए लोग खरीदारी करते रहे।
मकर संक्रांति का उल्लास कई दिन पहले से ही बाजारों में दिख रहा था। शहर के पॉलीटेक्निक चौराहा, रुहट्टा, ओलंदगंज, कोतवाली, शकरमंडी, सब्जी मंडी आदि इलाकों में लाई-चूड़ा, तिल-गुड़ से बनी मिठाइयों की दुकानें सजी हुई थीं। इस पर लोग खरीदारी भी कर रहे थे, मगर बुधवार को त्योहार से ठीक पहले खरीदारों की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही बाजार में सजी दुकानों पर लोग खरीदारी करते नजर आए। शहर के प्रमुख पपड़ी विक्रेता फिरतू राम ने बताया कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार महंगाई बढ़ने से ग्राहकों का रुझान कम है। कोविड-19 के कारण बाजार में पहले जैसा उत्साह नहीं है। फिर भी लोग परंपरा का निर्वहन करते हुए खरीदारी कर रहे हैं। बहन-बेटियों के घर खिचड़ी भेजने वालों की संख्या खरीदारों में अधिक है। पतंगबाजी के शौकीन त्योहार पर पतंग उड़ाने के लिए थोक में पतंगों की खरीदारी करते रहे। बच्चों और युवाओं की भीड़ अधिक थी। उधर, मकर संक्रांति पर स्नान के महत्व को देखते हुए शहर के गोमती घाटों पर साफ-सफाई की जाती रही। शाही पुल व सद्भावना पुल को झालर से सजाया गया है। सई-गोमती के संगम राजेपुर त्रिमुहानी घाट के अलावा अन्य घाटों के किनारे भी तैयारी होती रही।
सकारात्मकता का प्रतीक है मकर संक्रांति
पं. रवि पांडेय के मुताबिक मकर संक्रांति पर पुण्य काल सुबह से ही शुरू हो जाएगा। सुबह 8.30 बजे के बाद का मुहूर्त अच्छा है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति सकारात्मकता का भी प्रतीक है। दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता और उत्तरायण को देवताओं के दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। गंगास्नान व गंगातट पर दान को अत्यंत शुभ माना गया है। पानी में तिल मिलाकार स्नान करें। पूर्वाभिमुख होकर गायत्री मंत्र का जप करें। पूजा-अर्चना में भगवान को भी तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं।