बसुही नदी की सिल्ट सफाई के साथ ही जौनपुर-वाराणसी की सीमा पर दलदलीय भूभाग (कंस्ट्रस्टेड वेटलैंड) बनाया जाएगा। इसमें जलग्राही पौधे लगाए जाएंगे। इससे पानी प्रदूषण मुक्त होगा। इसके बाद बसुही का साफ पानी आगे जाकर वरुणा नदी में समाहित हो जाएगा। इसका निर्माण सिंचाई विभाग की तरफ से किया जाएगा।
बसुही नदी जिले के सुजानगंज क्षेत्र के करनौली रामपुर ताल से निकलकर रामपुर के कोचारी तक जाती है। इसकी कुल लंबाई करीब 80 किमी है। फिलहाल यह नाले के आकार की हो गई है। पानी पूरी तरह से सूख गया है। बसुही नदी में सिल्ट सफाई का काम पिछले एक माह से शुरू किया गया है। यह सिल्ट सफाई का काम मछलीशहर, रामनगर, रामपुर, बरसठी क्षेत्र में कराया जाना है। सिंचाई विभाग को 40 किमी व शेष काम मनरेगा से 39.2 किमी होना है।
बसुही नदी की अंतिम सीमा पर कोचारी के शंभूनाथ स्थल पर बसुही व वरुणा का मिलन होता है। यहां पर प्राकृतिक तरीके से जलग्राही पौधे लगाए जाएंगे। इसको बनाने के लिए एनजीटी की तरफ से दिल्ली की एक संस्था नामित की गई है। इसके खर्च का आकलन अभी नहीं किया जा सका है।
बसुही नदी में जौनपुर-वाराणसी की सीमा पर कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड बनाया जाना है। इसमें जलग्राही पौधे होंगे जो पानी को शुद्ध करने का काम करेंगे। इसके लिए दिल्ली की संस्था को नामित किया गया है। - प्रवीण खरे, डीएफओ।