उसरौली गांव में शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आरंभ हो गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान जयकारे और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
वृंदावन से आए स्वामी संजय भूषण के आचार्यत्व में कलश पूजन किया गया। पीत वस्त्रधारी महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर कलश लेकर समूचे गांव में भ्रमण किया। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी मंदिरों की परिक्रमा की गई। गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा लेकर निकले श्रद्धालुओं को देखने के लिए जहां-तहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो जा रही थी। इस स्वामी संजय भूषण ने कहा कि कलश यात्रा शांति का प्रतीक है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। इसमें सम्मलित होने से कई तीर्थ यात्राओं का फल मिलता है।
कलश यात्रा के दौरान अपने ईष्टदेव का सच्चे मन से स्मरण करना चाहिए। इससे ईश्वर में आस्था और विश्वास जगाने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही धार्मिक कार्यक्रम करने का संदेश भी लोगों को मिलता है। कलश यात्रा में राम लुटावन यादव, हृदयनाथ शुक्ला, देवमणि यादव, सुशीला देवी, चमेला, फूला देवी, कंचन, जड़ावती, जैराजी, मनभावती, माधुरी, आशा देवी, मंजू, नीलम, हौसिला प्रसाद मिश्रा, छोटेलाल, इंद्रजीत, प्रेम नारायण यादव आदि शामिल रहे।