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कहीं नदी में बही तो कहीं कुंड में पाट दी गई मूर्तियां

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20- सद्भावना पुल स्थित गोमती नदी के किनारे पाटा गया प्रतिमा विर्जन कुंड । - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। जिले में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन तो प्रशासन द्वारा नदीयों के किनारे विसर्जन कुंड बनवाकर करवा दिया गया। लेकिन उसके अवशेषों को विसर्जन कुंड से नहीं निकाला गया है। शहर में सद्भावना पुल के पूर्व दिशा में गोमती नदी के किनारे बनाए गए अस्थाई कुंड मूर्तियों के विसर्जन होने के बाद उनके अवशेषों को वहीं पाटवा दिया गया है। वहीं बदलापुर, महराजगंज, सुजानगंज आदि इलाकों में नदीयों के किनारे बनाए गए विसर्जन कुंड में मूर्तियों के अवशेषों को उसी तरह छोड़ दिया गया है। जिला प्रशासन के इस लापरवाही से जहां नदीयों का जल दुषित हुआ है। वहीं पर्यावरण के लिए भी खतरा बना हुआ है।
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शारदीय नवरात्र में जिले भर में कुल दो हजार मां दूर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। नौ दिन पूजा -अर्चन के बाद प्रतिमाओं को विसर्जन किया गाया। उधर नदी में बाढ़ आने के कारण प्रशासन द्वारा अस्थाई विसर्जन कुंड बनवाकर मूर्तियों को विसर्जित कराया गया। इस दौरान शहर क्षेत्र में स्थापित की गई 120 मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए विसर्जन घाट स्थित सद्भावना पुल के पूर्व दिशा में गोमती नदी के किनारे अस्थाई विसर्जन कुंड बनवाया गया। मूर्ति विसर्जन के दौरान ही कुंड के मिट्टी की दीवार नदी में बहने से अधिकांश मूर्तियों नदी में बह गई। आनन-फानन में प्रशासन ने उसके बंधवाकर मूर्तियों का विसर्जन करवाया। लेकिन विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेषों को वहीं पटवा दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में तो विसर्जन कुंड में ही मूर्तियों के अवशेष पड़े हैं। जिसे प्रशासन हटवाना मुनासिब नहीं समझे हैं। महराजगंज-क्षेत्र के सवंसा स्थित हनुमान मंदिर के पीछे स्थित पुराने तालाब में लगभग 50 स्थापित मां दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन प्रशासन की देख रेख ने कराया गया था। लेकिन अभी तक मर्तियों के अवशेषों को नहीं हटवाया गया है। सुजानगंज-क्षेत्र के सखवट स्थित नहर में मां दूर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन करायया गया था। लेकिन अभी भी इन मूर्तियों के अवशेष पड़े हुए हैं। जिससे प्रशासन अभी तक हटवाना मुनासिव नहीं समझा है। बदलापुर - क्षेत्र में स्थापित किए गए दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शाहपुर गांव में पीली नदी के किनारे बनाए गये विसर्जन कुण्ड में किया गया था। हांलाकि नदी में उसका बहाव नहीं है। फिर भी कुण्ड में मूर्तियों का अवशेष पड़ा है। जिसे अभी तक नहीं हटवाया गया है।
मूर्तियों के अवशेषों को विसर्जन कुंड में रहने से जल प्रदूषण की संभावना अधिक है। कुंड का पानी नदी में ही जाता है। जिससे नदी दूषित होती है। अगर कुंड के पानी में अवशेष सड़ेगे तो उससे पर्यावरण प्रदुषित होगा। इसके लिए नदी से दूर कुंड होनी चाहिए, जहां का पानी नदी में नहीं आए। मूर्तियों के अवशेषें को शुद्घिकरण कर प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
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डा.डीपी उपाध्याय
पर्यावरणविद
अगर विसर्जन कुंड में दुर्गा प्रतिमाओं के अवशेष पड़े हैं तो उसे शीघ्र हटवा कर शुद्घ स्थानों पर रखवा दिया जाएगा। वैसे अधिकांश कुंड से दुर्गा प्रतिमा के अवशेषों को हटवा दिया गया है।
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सुरेंद्रनाथ मिश्र
नगर मजिस्ट्रेट
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