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थानेदार और चौकी इंचार्ज तो बदले, वर्षों से जमे सिपाहियों का क्या

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जौनपुर। कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए थानेदार और चौकी इंचार्ज के तबादले किए जाते रहते हैं। मगर एक ही थाने में वर्षों से जमे सिपाहियों पर अफसरों की नजर नहीं है। जबकि सिपाही ही इलाके में वसूली के सूत्रधार माने जाते हैं। चंदौली और अब वाराणसी में वसूली के दर की सूची वायरल होने के बाद जौनपुर में वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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पुलिस नियमावली के मुताबिक किसी भी थाने में कोई सिपाही व अधिकारी तीन साल से अधिक नहीं रह सकता लेकिन जिले के कुछ थाने ऐसे हैं जहां सिपाही वर्षों से जमे हैं। थाना तो दूर उनकी बीट तक नहीं बदली जाती। थानेदारों और उप निरीक्षकों का तबादला तो हुआ लेकिन इन सिपाहियों की किसी ने खोज-खबर नहीं ली। वर्षों जमे सिपाहियों का एक नेटवर्क होता है और वे ही वसूली का मुख्य जरिया बनते हैं। अवैध निर्माण कराना है या अवैध रूप से वाहनों के संचालन का काम उनके संरक्षण में ही चलता है। रोडवेज डिपो से एक किलोमीटर के दायरे में निजी वाहन सवारियां नहीं ले सकते हैं लेकिन डिपो के पास ही डग्गामार वाहन सवारियां भरते हैं। इसके खिलाफ रोडवेज कर्मचारी कई बार आवाज उठा चुके हैं लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती है।
वसूली को लेकर हो चुकी है भिड़ंत
शाहगंज सर्किल के एक थाने में कुछ माह पूर्व ही वसूली को लेकर सिपाहियों की एक एसआई से तकरार हो गई थी। मामला इस कदर बिगड़ा कि प्रभावशाली सिपाहियों ने दरोगा जी की ही लानत-मलानत कर दी। मामला सुर्खियों में पहुंचा तो बाद में संबंधितों पर कार्रवाई हुई। हाल ही में शहर सर्किल के ही एक थाने में चौकी पर जमे सिपाहियों की अवैध वसूली की शिकायतों पर प्रभारी को नपना पड़ा था।
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एक ही थाने लंबे समय से जमे सिपाहियों की भी सूची तैयार की जा रही है। उनका तबादला किया जाएगा। रही बात अवैध वसूली की तो अगर ऐसी किसी की शिकायत है तो वह मुझे व्हाट्सएप के जरिए शिकायत कर सकता है। वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राजकरन नय्यर, एसपी।
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