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सात्विक वृत्तियों के संग ही आता है सत्संग : डॉ. मदन मोहन

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घनश्यामपुर बाजार में चल रही श्री राम कथा में श्रोताओं को संबोधित करते डॉ मदन मोहन मिश्र। संवाद
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बदलापुर। सात्विक वृत्तियों के संग ही सत्संग आती है। तामसी वृत्तियों का संग ही कुसंग है। कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। हमें हमेशा कुसंग से बचकर सत्संग करना चाहिए।
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यह बातें घनश्यामपुर बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर चल रही श्रीराम कथा महोत्सव में वाराणसी से पधारे मानस कोविद डॉ. मदन मोहन मिश्र ने सोमवार को कही। उन्होंने कहा कि सती ने सीता का वेष तो बनाया लेकिन आचरण नहीं बना पाई। क्योंकि असली सीता राम के पीछे चलती थी जबकि सीता बनीं हुई सती राम के आगे चलने लगी। इसलिए नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि दक्ष का यज्ञ इसलिए पूर्ण नहीं हुआ क्योंकि उसमें यज्ञ के स्वरूप विष्णु यज्ञ की विधि ब्रह्मा और विश्वास के प्रतीक शंकर उपस्थित नहीं थे। जहां जाने के बाद विवाद होने की संभावना हो उस जगह पर नहीं जाना चाहिए। इस दौरान धर्मेंद्र शुक्ल ने भजन सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध किया। स्वागत पूर्व प्रधान राम जियावन तिवारी व संचालन धर्मेंद्र शुक्ल ने किया। इस दौरान सुरेश बरनवाल, जनार्दन बरनवाल, दूध नाथ तिवारी, पारस नाथ अग्रहरि, अम्बरीष अग्रहरि, दीपक मोदनवाल उपस्थित रहे। संवाद
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