सतहरिया। भदोही कबीर पंथ आश्रम से आए संत ध्यानदास साहब ने जीवन लक्ष्य की प्राप्ति और सच्चे साधक बनने में सद्गुरु की कृपा को जरूरी बताया। कहा कि सद्गुरु के आशीर्वाद से ही आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। वह मुंगराबादशाहपुर के कबीरपुर स्थित कबीर पंथ आश्रम पर चल रहे दो दिवसीय सत्संग के पहले दिन सोमवार को बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मानव जन्म अमूल्य है। फिर भी हम उसकी वास्तविकता से परे होकर चौरासी लाख योनियों में भटक रहे हैं। ज्ञान-अज्ञान और प्रकाश-अंधकार के गूढ़ भेद को न समझने के कारण मानव सांसारिक मोह में फंसकर अपने सुंदर जीवन को बर्बाद कर रहा है। सत्य ही जीवन जीने की परिभाषा व जीवन में प्रकाश का उद्गम है। इसकी प्राप्ति सच्चे गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलने से ही हो सकती है। गौतम बुद्ध को सत्य व ज्ञान प्राप्ति के लिए युवराज पद व राजदरबार का परित्याग करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जीवों का असली घर चौथा लोक या अमर लोक है। कबीरदास ने इसी का बोध कराया था। इस मौके पर रतनदास, चेतनदास, केदारदास, लंबूदास, फूलचंद्र आदि मौजूद रहे।