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605 का टिकट 640 रुपये में खरीदकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से जौनपुर पहुंचे यात्री, 20 घंटे के सफर में भोजन-पानी के लिए तड़पते रहे

Fri, 08 May 2020 05:21 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
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जौनपुर के भंण्डारी रेलवे जंक्शन पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए यात्री। - फोटो : JAUNPUR
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श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आ रहे यात्रियों ने मुफ्त यात्रा के दावों की लगातार पोल खुल रही है। टिकट पर छपे किराए से ज्यादा की वसूली की जा रही है। शुक्रवार को 1257 यात्रियों को लेकर बड़ोदरा से जौनपुर आई स्पेशल ट्रेन में सवार यात्रियों से टिकट के 640 रुपये लिए गए थे जबकि टिकट मूल्य 605 रुपये ही था।

अतिरिक्त रुपये देने के बाद यात्री 20 घंटे के सफर में वह भोजन-पानी के लिए तड़पते रहे। जौनपुर पहुंचने पर प्लेटफार्म पानी लेने की होड़ लगी रही। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी को रोडवेज की 50 बसों में बैठाकर घरों की ओर रवाना किया गया। बड़ोदरा से बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे रवाना हुई ट्रेन को सुबह पौने दस बजे जौनपुर पहुंचना था।
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प्रशासन सुबह से ही तैयारी कर रहा था। थर्मल स्क्रीनिंग से लेकर नाश्ता-पानी की व्यवस्था की गई थी। तीन घंटे विलंब से ट्रेन दोपहर पौने एक बजे जौनपुर जंक्शन पहुंची। क्रमवार एक-एक बोगी के यात्रियों को उतारा गया। प्लेटफार्म पर बने गोलों में खड़ा कर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की गई। ट्रेन में सबसे ज्यादा 729 यात्री जौनपुर के थे।

इसके अलावा प्रयागराज के 266 , आजमगढ़ के 48 , अमेठी के 34, रायबरेली के 26 , जालौन के 13, अयोध्या के 12 यात्री थे। पांच यात्री राजस्थान और एक मध्य प्रदेश के मंडला का रहने वाला था। जांच के बाद स्टेशन के बाहर लगी रोडवेज की बसों में सवार कर उन्हें गंतव्य को रवाना किया गया। इस दौरान डीएम दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ अनुपम शुक्ल, एडीएम रामप्रकाश, सदर एसडीएम नितीश कुमार सिंह सहित पुलिस-प्रशासन के अफसर डटे रहे।

आज पटियाला से आएगी ट्रेन
जौनपुर जिले में अब तक दो श्रमिक स्पेशल ट्रेन गुजरात से आ चुकी है। शनिवार को तीसरी ट्रेन पहुंचेगी। पंजाब के पटियाला से करीब 12 सौ यात्रियों को लेकर ट्रेन सुबह साढ़े आठ बजे जौनपुर आएगी। यहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें संबंधित जिलों में भेजा जाएगा।
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दुख और दुश्वारियों में गुजरे 44 दिन, सरकार से नाराजगी

गुजरात से आए श्रमिक। - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के 44 दिन काटना परदेश में फंसे श्रमिकों के लिए काटना मुश्किल हो गया था। विशेष ट्रेन से जौनपुर पहुंचे श्रमिकों को घर पहुंचने की खुशी तो थी लेकिन रोजगार छिन जाने का मलाल भी साफ दिखा। दुख और दुश्वारियों से भरे अनेक किस्सों के साथ करीब साढ़े 12 सौ किमी का सफर कर यह यात्री जब जौनपुर पहुंचे तो अपनी मिट्टी की खुशबू उन्हें पुलकित कर रही थी।

पिता के साथ ट्रेन से उतरी प्रतापगढ़ निवासी प्रिया पटेल ने बताया कि गुजरात में उनका परिवार सब्जी का व्यवसाय करता था। लॉक डाउन में सब बंद हो गया। वहां मकान का किराया, खाने का खर्च अधिक था। राहत कहीं से मिलती नजर नहीं आ रही थी तो घर लौट आए। दीपक सिंह ने बताया कि घर से पैसा मंगाकर खाना पड़ रहा था। यूपी सरकार जितनी संवेदनशील गुजरात सरकार नहीं थी।

प्रतापगढ़ की कंचन वर्मा ने बताया कि पति के टाइल्स लगाते थे। काम बंद हुआ और जमा पूंजी भी खत्म हो गई। जालौन के राकेश पानी पूरी बेचते थे। दुकान बंद हुई तो कमरे का किराया भी निकालना मुश्किल हो गया। टाइल्स का ही काम करने वाले प्रतापगढ़ के राधेश्याम ने कहा कि अब अब परदेश नहीं जाना है।

यहीं काम करेंगे। फैजाबाद के सुजीत कुमार से मूंगफली बेचते थे। लॉक डाउन से धंधा तो बंद हुआ ही जमा पूंजी भी चली गई। घाटा सहना पड़ा। पट्टी प्रतापगढ़ के जवाहर दिन में सब्जी बेचने और रात में वाचमैन का काम करते थे। काम बंद हुआ और पैसा खत्म हो गया तो क्या करते।



 
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