मीरमस्त मुहल्ले के शाही गज की मस्जिद में तरावीह पढ़ाने वाले 15 वर्षीय हाफिज मोहम्मद फरीद।
मीरमस्त मोहल्ला स्थित शाहीगज की मस्जिद में महज 15 साल के हाफिज मोहम्मद फरीद ने तराबीह के फरायज को अदा कराया। हाफिज ने यहां चांद रात से लेकर ग्यारहवें रोजे तक तराबीह पढ़ाई।
खासियत यह कि हाफिजे कुरआन होकर पहली बार उन्होंने बुलंद आवाज में कुरान की आयतों का तेलावत किया। तराबीह खत्म होने पर शनिवार को शाही गज की मस्जिद में जलसा हुआ। इसमें मदरसा हनफिया के तमाम उलेमाओं ने शिरकत की।
सभी ने हाफिज मोहम्मद फरीद को मुबारकबाद दिया। इस मौके पर मौलाना शरीफुलहक ने कहा कि माहे रमजान का महीना बरकतों, रहमतों और मगफिरत का महीना होता है। इसी माह में अल्लाह की किताब कुरान मजीद माहे रमजान के आखिरी सप्ताह की ताख रातों में उतारी गई थी।
जिसे सबे कद्र करात भी कहते हैं। इसीलिए माहे रमजान में माहे कुरान का तिलावत करना और जो तिलावत नहीं कर सकता उसके लिए कुरान का सुनना भी सवाब होता है। इसीलिए माहे रमजान में सहाबे इकराम व खुलफाए राशदीन कसरत से तराबीह पढ़ा करते थे। डा. हसीन बबलू ने शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर पूर्व विधायक हाजी अफजाल, मो. कमर, हाजी अब्दुल हक, मो. अरसद, मो. अजमद, मो. कमर, मो. तालिब आदि थे।