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हर गांव चार सड़कों से जुडेगा, बनाई गई चतुर्भुज योजना

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जौनपुर। हर गांव को संपर्क मार्ग से जोड़ा जाएगा। वह भी एक संपर्क मार्ग से नहीं बल्कि गांव के चारों तरफ रास्ते होंगे। किसी भी तरफ से लोग गांव तक आसानी से पहुंच सकेंगे। गांवों में आवागमन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने चतुर्भुज योजना का खाका तैयार किया है। सभी लेखपालों और सचिवों से अपने क्षेत्र के गांवों के सभी मार्गों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। सड़कें मनरेगा से बनवाई जाएंगी। इस योजना से मजदूरों को भी काम मिलेगा।
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जिले में 1749 ग्राम पंचायतें और 3317 राजस्व गांव हैं। लगभग सभी गांवों में एक संपर्क मार्ग है। उसके अलावा भी कई रास्ते हैं जो गांव को दूसरे गांवों से जोड़ते हैं। उनमें से कुछ अतिक्रमण के चलते पगडंडी में तब्दील हो गए हैं। अच्छे रास्तों की कमी से गांवों का विकास भी प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार की महानगरों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना से प्रेरित होकर जिले में गांवों को जोड़ने वाली चतुर्भुज योजना की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत प्रत्येक गांव को जोड़ने वाले कम से चार या उससे अधिक मार्ग बनाए जाएंगे। उनका पक्का भले न किया जाएगा लेकिन मार्ग इतना चौड़ा जरूर बनाया जाएगा कि उस पर आवागमन सुगम हो सके। ग्रामीण किसी भी रास्ते को पकड़कर एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से पहुंच सके। अफसरों का मानना है कि इससे आवागमन की सुविधा तो बेहतर होगी ही, भूमि विवादों का भी निपटारा होगा। सड़कें बनने से गांव के विकास में भी मदद मिलेगी।
मजदूरों को मिलेगा काम, दूर होंगे भूमि विवाद
लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में घर लौटे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से जोड़कर काम दिया जा रहा है। उनसे मनरेगा पार्क बनवाया जा रहा है और तालाब की खोदाई कराई जा रही है। इसके बाद सड़कों पर काम किया जाएगा। उनको काम मुहैया कराने के मकसद से चतुर्भुज योजना बनाई जा रही है। इसके तहत ज्यादातर मार्गों पर मिट्टी व इंटरलाकिंग का काम ही कराया जाएगा। मगर इससे चकरोडों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सकेगा। चकरोड की पैमाइश न होने के कारण कई गांवों में भूमि विवाद भी चल रहे हैं। सड़कें बनने से इन विवादों का भी निस्तारण हो जाएगा।
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चतुर्भुज अभियान के तहत सभी गांवों में मौजूद सभी रास्तों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए लेखपाल व सचिव की टीम बनाई जाएगी, जो मौके पर जाकर मार्ग की पैमाइश कर उसकी भूमि चिह्नित करेंगे। चार दिसंबर को लेखपालों व सचिवों की बैठक जिला मुख्यालय पर बुलाई गई है। उसमें योजना की रूपरेखा तैयार की जाएगी। -अनुपम शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी
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