उधर, कुलपति ने एक दिन पहले वार्डन और चीफ वार्डन को बदल दिया था। साथ ही जांच समिति भी गठित की थी। तीन सदस्यीय जांच समिति में चीफ प्रॉक्टर डॉ. राजकुमार सोनी भी सदस्य थे। जिन्हें अब पद से हटा दिया गया है। वहीं, दीक्षांत समारोह के दौरान विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर इलेक्ट्रिशियन धीरज श्रीवास्तव को हटा दिया था। उधर, छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।
छात्र नेताओं ने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। छात्रों के मुताबिक जांच समिति में उन्हीं लोगों को शामिल किया गया है, जिन पर पहले से ही वार्डन रहने के दौरान गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। छात्र नेता मंगलम त्यागी, अभिषेक दुबे और दिव्यांशु सिंह ने कहा है कि यदि दागी प्रोफेसर ही अपने खिलाफ जांच करेंगे तो निष्पक्ष रिपोर्ट आने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
छात्रों का आरोप है कि ट्रांजिट हॉस्टल में विदेशी शराब मिलने के अलावा सफाई, भोजन और छात्रों से अभद्र व्यवहार आदि मामलों की शिकायतें पहले भी की गई थीं। उस समय भी कुछ वार्डन पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब उन्हीं लोगों को फिर से जिम्मेदारी दी जा रही है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि ऐसे लोगों को जांच से दूर रखकर स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह का कहना है कि चीफ प्रॉक्टर डॉ. राजकुमार सोनी को उनके पद से हटा दिया गया है। छात्रों ने जो आरोप लगाया है उस पर भी विचार किया जाएगा।