जौनपुर। मुहर्रम की रात नगर के अजमेरी मोहल्ला में खान बहादुर मुफ्ती हैदर हुसैन मरहूम की हवेली के इमामबाड़े में मजलिस हुई। जुल्जनाह, ताबूत व अलम का जुलूस अकीदत के साथ उठा। इसमें लोगों ने जियारत किया। नौहा पढ़ा और मातम कर हजरत इमाम हुसैन की याद में गम का इजहार किया।
जुलूसे अजा की मजलिस में सोजख्वानी जीशान अशर ने किया। पेशख्वानी कैफी मोहम्मदाबादी व नजमुल हसन ने किया। मजलिस को मौलाना सैयद मोहम्मद हसन आब्दी आजमगढ़ी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि मुहर्रम इस्लाम धर्म के साल का पहला महीना है जिसमें पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाने वाला गम और शोक का महीना है।
मौलाना मोहम्मद हसन आब्दी ने कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का अमर संदेश है। हजरत इमाम हुसैन ने सत्ता, पद या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम का महीना हमें सब्र, त्याग, नैतिकता और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की प्रेरणा देता है। कर्बला का संदेश यह है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, सत्य और न्याय का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। मौलाना ने लोगों से शांति, भाईचारे और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की। कहा कि शहीदाने-कर्बला की कुर्बानियों को याद कर उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
मजलिस के बाद शबीहे जुल्जनाह व अलम और शबीहे ताबूते अली अकबर बरामद हुआ। मुफ्ती सारिब मेहंदी ने गमगीन आवाज़ में बैनिया नौहा पढ़ा। जुलूस में अंजुमन सज्जादिया मुफ्ती मोहल्ला ने नौहा पढ़ा व मातम किया। जुलूस देर रात संपन्न हुआ। मुफ्ती अनवार हैदर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सैयद मोहम्मद मुस्तफा, पिनकी आब्दी, मुफ्ती जाफर रजा अर्शी, दानिश काजमी, मो. हसन नसीम, मुफ्ती नजमुल हसन, कायम आब्दी, मो. आदिल, तालिब जैदी, अनवारुल हसन शामिल हुए।